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तरावीह की दुआ

(Dua for Taraweeh (prayer performed during Ramadan nights))


तरावीह की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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तरावीह की दुआ

Updated :08 May, 2026 03:56 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन रमज़ान स्पेशल

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سُبْحَانَ ذِی الْمُلْکِ وَالْمَلَکُوْتِ ط سُبْحَانَ ذِی الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْکِبْرِيَآئِ وَالْجَبَرُوْتِ ط سُبْحَانَ الْمَلِکِ الْحَيِ الَّذِی لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوْتُ سُبُّوحٌ قُدُّوْسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِکَةِ وَالرُّوْحِ ط اَللّٰهُمَّ اَجِرْنَا مِنَ النَّارِ يَا مُجِيْرُ يَا مُجِيْرُ يَا مُجِيْر۔

तरावीह की दुआ

तरावीह की दुआ

अर्थ:

पाक है वह जो छिपे हुए और प्रकट राज्य का मालिक है। पाक है वह जो इज़्ज़त, अज़मत, रौब, क़ुदरत, घमंड (गौरव) और शान का मालिक है। पाक है वह मालिक, जीवित (हमेशा ज़िंदा), जो न सोता है और न मरता है। वह पूर्ण रूप से पवित्र है, हमारा रब है और फरिश्तों और आत्माओं का रब है। <br>हे अल्लाह, हमें जहन्नम की आग से पनाह दे। हे पनाह देने वाले, हे पनाह देने वाले, हे पनाह देने वाले।

अंग्रेजी में मतलब:

Exalted is the Possessor of the hidden and the manifest dominion. Exalted is the Possessor of Might, Greatness, Reverence, Power, Pride, and Majesty. Exalted is the Master, the Living, the one who neither sleeps nor dies. All-perfect, All-holy, Our Lord, and the Lord of the angels and the souls. O Allah, grant us refuge from the Hellfire. O Granter of refuge, O Granter of refuge, O Granter of refuge.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

तरावीह की दुआ वास्तव में अल्लाह की प्रशंसा और उसकी महानता का एक बेहद खूबसूरत संकलन है, जिसे तरावीह की नमाज़ के दौरान हर चार रकात के बाद पढ़ा जाता है। इस दुआ में अल्लाह को "मुल्क" (दिखने वाली दुनिया) और "मलकूत" (छिपी हुई रूहानी दुनिया) दोनों का अकेला मालिक माना गया है। यह हमें याद दिलाती है कि केवल अल्लाह ही है जो "अल-हय्य" (सदैव जीवित) है और जिसे न नींद आती है न मौत। दुआ के अंत में जहन्नम की आग से जो पनाह माँगी गई है, वह रमज़ान के पवित्र महीने के मूल उद्देश्य—यानी नरक से मुक्ति और अल्लाह की दया प्राप्त करने को दर्शाती है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह पूरी दुआ अपने वर्तमान स्वरूप में कुरान की आयत नहीं है, और न ही यह किसी एक हदीस में इन शब्दों के साथ पूर्ण रूप से वर्णित है। यह विद्वानों और बुजुर्गों द्वारा संकलित की गई है। हालाँकि, इस दुआ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा— "सुब्बूहुन क़ुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर-रूह" (अति पवित्र, हमारा रब और फरिश्तों और रूह का रब)—सीधे सहीह मुस्लिम की हदीस से लिया गया है, जिसे नबी ﷺ रुकू और सजदे में पढ़ा करते थे। अतः इस दुआ की जड़ें सुन्नत और अल्लाह के पवित्र नामों में ही समाहित हैं।


सारांश (Summary)

यह दुआ तरावीह की नमाज़ के बीच एक रूहानी विश्राम है, जो हमें खुदा की असीमित शक्ति और गौरव की याद दिलाती है। इसके शब्द इंसान के दिल में अल्लाह का डर और उससे उम्मीद दोनों जगाते हैं। यह हमें सांसारिक तुच्छता से ऊपर उठाकर फरिश्तों और आत्माओं के रब की महानता पर केंद्रित करती है। अंततः, बार-बार पनाह माँगना यह स्पष्ट करता है कि हमारा असली लक्ष्य आख़िरत (परलोक) की कामयाबी और जहन्नम से सुरक्षा है।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि तरावीह की दुआ पढ़ने से इबादत में और ज़्यादा सुकून मिलता है?

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