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नींद से बेदार (सो कर उठने) की दुआ (प्राथना)

(Dua When Waking UP from Sleep)


नींद से बेदार (सो कर उठने) की दुआ (प्राथना) हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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नींद से बेदार (सो कर उठने) की दुआ (प्राथना)

Updated :29 Apr, 2026 04:11 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन परिवार और घर सुबह और शाम

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الْحَمْدُ لِلّٰہِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ

नींद से बेदार (सो कर उठने) की दुआ (प्राथना)

नींद से बेदार (सो कर उठने) की दुआ (प्राथना)

अर्थ:

सभी तारीफ़े अल्लाह के लिए जिसने हमे मौत (नींद) के बाद जीवन (बेदारी) अता फरमाई और हमे इसी तरफ लौटना है

अंग्रेजी में मतलब:

All Praise onto Allah (Almighty) Who granted us life after death (Sleep) and we are return to him.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

इस्लामी मान्यताओं में नींद को 'छोटी मौत' कहा गया है, क्योंकि सोते समय हमारी रूह अल्लाह की निगरानी में होती है। जब हम सुबह उठते हैं, तो यह अल्लाह का करम (अहसान) है कि उसने हमें दोबारा जीवन दिया ताकि हम नेकियाँ कर सकें और अपनी आख़िरत (परलोक) संवार सकें। यह दुआ पढ़ना हमें यह याद दिलाता है कि हमारा जीवन और मृत्यु पूरी तरह से अल्लाह के हाथ में है और एक दिन हमें उसी की तरफ लौटना है। यह दुआ हमारे दिन की शुरुआत अल्लाह के शुक्र और अपनी असली मंज़िल की याद के साथ करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सुन्नत-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पूरी तरह साबित है:

  • हदीस का संदर्भ: सहीह बुखारी (हदीस संख्या 6312) और सहीह मुस्लिम में रिवायत है कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब सोकर उठते तो यह पढ़ते थे:

    "अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बअदा मा अमातना व इलैहिन नुशूर।"

  • कुरान का संदर्भ: हालांकि दुआ के शब्द सुन्नत से हैं, लेकिन सूरह अज़-ज़ुमर (39:42) में इस अवधारणा का ज़िक्र है कि अल्लाह नींद में रूह को अपने पास रख लेता है और फिर जिन्हें चाहता है उन्हें वापस लौटा देता है, जो यह दर्शाता है कि हर बार जागना अल्लाह की ओर से एक नया जीवन है।

सारांश (Summary)

नींद से जागने के बाद यह दुआ पढ़ना अल्लाह के प्रति शुक्रगुज़ारी का एक बेहतरीन माध्यम है। यह हमें याद दिलाता है कि हर नया दिन अल्लाह की तरफ से दी गई एक नई ज़िंदगी है, जिसे हमें नेक कामों में बिताना चाहिए। यह दुआ हमारे दिन की शुरुआत को इबादत में बदल देती है और हमें मौत और आखिरत की हकीकत से जोड़े रखती है। इसे पढ़ने से हम अल्लाह की नेमतों का अहसास करते हैं और दिन भर की परेशानियों में भी अल्लाह को याद रखने का हौसला पाते हैं।

नींद से उठते ही अल्लाह को याद करने और मौत का तसव्वुर (विचार) करने में क्या हिकमत (बुद्धिमानी) है?

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