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आईने मे देखने की दुआ

(Dua When Looking in the Mirror)


आईने मे देखने की दुआ हिन्दी में पढ़ें और याद करे आसान अर्थ के साथ।

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आईने मे देखने की दुआ

Updated :29 Apr, 2026 03:32 PM IST

श्रेणियाँ (कटेगरीस) : कुरान से दैनिक जीवन पहनावा और दैनिक जीवन परिवार और घर

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اَللّٰهُمَّ أَنْتَ حَسَّنْتَ خَلْقِي فَحَسِّنْ خُلُقِي

आईने मे देखने की दुआ

आईने मे देखने की दुआ

अर्थ:

अल्लाह अज़्वजल तूने मेरी सूरत अच्छी बनाई तू मेरी सीरत (अखलाक) भी अच्छी करदे।

अंग्रेजी में मतलब:

O Allah Azzawajal as you made my outward appearance good make my character good too.

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Dua Explanation, Quranic Reference & Summary

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व्याख्या (Explanation)

आईने में देखना हमें अपनी शारीरिक सुंदरता (सूरत) का अहसास दिलाता है, लेकिन यह दुआ हमें याद दिलाती है कि इस्लाम में 'सूरत' से ज़्यादा 'सीरत' (चरित्र/अखलाक) की अहमियत है। जब हम आईने में अपनी शक्ल देखते हैं, तो यह दुआ पढ़कर हम अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसने हमें बेहतरीन रूप दिया, और साथ ही यह प्रार्थना करते हैं कि जिस तरह उसने हमें बाहर से सुंदर बनाया है, हमारे दिल और हमारे व्यवहार को भी उतना ही सुंदर बना दे। यह दुआ अहंकार (घमंड) को दूर रखने और खुद को बेहतर इंसान बनाने का एक आध्यात्मिक तरीका है।


क्या कुरान या हदीस में इसका कोई संदर्भ है?

यह दुआ सुन्नत-ए-रसूल से पूरी तरह साबित है। हालांकि कुरान में कोई विशिष्ट आयत इस दुआ के शब्दों वाली नहीं है, लेकिन हदीस की किताबों में यह स्पष्ट रूप से मिलती है। मुसनद अहमद (हदीस संख्या 24403) में रिवायत है कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब आईने में देखते तो यह दुआ पढ़ते थे:

"अल्लाहुम्मा कमा हस्सन्ता खल्की फहस्सिन खुलुकी" (ऐ अल्लाह! जिस तरह तूने मेरी सूरत को सुंदर बनाया है, मेरे चरित्र/अखलाक को भी सुंदर बना दे।)


सारांश (Summary)

आईने में देखते वक्त यह दुआ पढ़ना हमें यह याद दिलाता है कि शारीरिक सुंदरता अल्लाह की एक नेमत है, जिसे अच्छे चरित्र के साथ संवारना ज़रूरी है। यह दुआ अहंकार को खत्म कर हमारे अंदर विनम्रता पैदा करती है और हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती है। इसे पढ़ने से हम अपनी बाहरी शक्ल के साथ-साथ अपने अंदरूनी व्यक्तित्व (अखलाक) को भी निखारने की कोशिश करते हैं। यह एक छोटी सी सुन्नत हमारे दैनिक व्यवहार को इबादत में बदल देती है।

इस्लाम में शारीरिक सुंदरता (सूरत) के मुकाबले में अच्छे अख़लाक (चरित्र) को क्यों ज़्यादा अहमियत दी गई है?

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