اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : ज़मीन फ़लक माह-ओ-अख़्तर हुसैन वाले हैं
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 02:09 PM IST
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ज़मीन फ़लक माह-ओ-अख़्तर हुसैन वाले हैं,
ये क़ायनात के मंज़र हुसैन वाले हैं
यज़ीदियत से है इन्कार बच्चे बच्चे को,
हमारे घर के सब असग़र हुसैन वाले हैं
हवा से कह दो वो आ जाए आँधियाँ लेकर,
मेरे चराग़ के तेवर हुसैन वाले हैं
काट तो सकते हैं लेकिन झुका नहीं सकते,
हमारे जिस्म पे ये सर हुसैन वाले हैं
तुम अपनी कसरत-ए-तादाद पे न इतराओ,
सुनो हमारे 72 हुसैन वाले हैं
हुसैनियों को पिलाएँगे जाम-ए-कौसर का,
हज़ूर साहिब-ए-कौसर हुसैन वाले हैं
ग़म-ए-हुसैन का मातम तो हम नहीं करते,
हम उनकी राह पे चल कर हुसैन वाले हैं
वो ज़ुल्म करके रविश पे हैं क़ायम,
हम उनके ज़ुल्म को सह कर हुसैन वाले हैं
मेरी नवा है फ़रीदी हुसैनियत का फ़रोग़,
ज़बान ओ फ़िक्र के जौहर हुसैन वाले हैं
रज़ा व हामिद ओ नूरी, मुफस्सिर-ए-आज़म,
हमारे हज़रत-ए-अख़्तर हुसैन वाले हैं
रज़ा व हामिद और मुजाहिद-ए-मिल्लत,
हमारे हबीब-ए-मिल्लत हुसैन वाले हैं
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यह कलाम नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) और शुहदा-ए-कर्बला की अज़ीम क़ुर्बानी, उनके सब्र और हक़-परस्ती का बहुत ही ख़ूबसूरत बयान है।
इस कलाम का अर्थ है कि ज़मीन, आसमान, चाँद और तारे सब इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) की अज़मत के गवाह हैं और पूरी कायनात उन्हीं के नूर से रौशन है। शायर कहता है कि सच्चा हुसैनी वह है जो ज़ुल्म के आगे सर कटा तो सकता है लेकिन झुका नहीं सकता, और बातिल (यज़ीदियत) के ख़िलाफ़ हमेशा डटा रहता है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Hindi / English Meaning) |
|---|---|
| फ़लक | आसमान (Sky / Heavens) |
| माह-ओ-अख़्तर | चाँद और तारे (Moon and Stars) |
| यज़ीदियत | ज़ुल्म, अन्याय और असत्य की नीति (Oppression / Falsehood) |
| असग़र | इमाम हुसैन के नन्हे शहज़ादे (सकेत: छोटा बच्चा) |
| तेवर | अंदाज़ या हौसला (Attitude / Spirit) |
| कसरत-ए-तादाद | संख्या की अधिकता / भारी गिनती (Majority in number) |
| जाम-ए-कौसर | जन्नत की नहर का पवित्र पानी (Heavenly drink) |
| रविश | तरीक़ा, चलन या रास्ता (Way / Trend) |
| नवा | आवाज़ या पुकार (Voice / Melody) |
| फ़रोग़ | बढ़ावा देना या तरक़्क़ी (Promotion / Elevation) |
इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) की ज़ात हक़ और सब्र की वह आला मिसाल है जिसने पूरी दुनिया को जीने का सलीका सिखाया। शायर 'फ़रीदी' कहते हैं कि दुश्मन अपनी बड़ी तादाद पर न इतराए क्योंकि कर्बला के ७२ (72) जाँबाज़ हर दौर के लश्कर पर भारी हैं, और हम उनके बताए हुए सब्र व नमाज़ के रास्ते पर चलकर ही सच्चे हुसैनी बनते हैं।
इस कलाम के मुताबिक, शायर ने हक़ के रास्ते पर चलने वाले कर्बला के कितने जाँबाज़ों (हुसैनियों) का ज़िक्र किया है?