मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : यज़ीद था हुसैन है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : मोहम्मद अली फ़ैज़ी
नातख्वान/कलाकार: मोहम्मद अली फ़ैज़ी
जोड़ा गया : 25 Jan, 2024 10:14 AM IST
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किसी ने जब भी यह कहा, यज़ीद था हुसैन है (×3)
तो सुनके आ गया मज़ा, यज़ीद था हुसैन है (×2)
हुसैन और यज़ीद में था क्या फ़र्क़ अगर कहा (×3)
तो बोली मेरी वालिदा, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
यज़ीद हो गया फ़ना, हुसैन को मिली बका (×3)
है बच्चा बच्चा बोलता, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यज़ीदियों में भी यज़ीद नाम का कोई नहीं (×3)
हैं दुश्मनों को भी पता, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
ज़माने भर में देख लो हुसैन के गुलाम हैं (×3)
यह है खुदा का फ़ैसला, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
जिसे भी देखना हो, वह इराक़ जाके देख ले (×3)
यह कह रही है कर्बला, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यक़ीन से मैं कह रहा हूँ, देख लेना हश्र में (×3)
कहेंगे खुद मावीया, यज़ीद था हुसैन है (×2)
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
यज़ीद था हुसैन है, यज़ीद था हुसैन है
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यह मनकबत इमाम हुसैन (अ.स) की अमरता और यज़ीद की हार का वर्णन करती है, जो यह स्पष्ट करती है कि सत्य कभी नहीं मरता और असत्य का नामोनिशान मिट जाता है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि समय साक्षी है कि यज़ीद केवल एक बीता हुआ कल (था) है जो ज़ुल्म के साथ खत्म हो गया, जबकि हुसैन (अ.स) एक वर्तमान और भविष्य (हैं) हैं जो आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा हैं। शायर कहता है कि कर्बला की ज़मीन से लेकर क़यामत के मैदान तक यही गूँज होगी कि बुराई मिट गई और सच्चाई अमर हो गई।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फ़ना | नष्ट होना / मिट जाना |
| बका (बक़ा) | अमरता / हमेशा रहना |
| वालिदा | माता / माँ |
| हश्र | प्रलय का दिन / न्याय का दिन |
| ज़माने भर | पूरी दुनिया में |
| यकीन | विश्वास / भरोसा |
इस कलाम का सार यह है कि यज़ीद ने शक्ति के बल पर जीतना चाहा लेकिन वह इतिहास के पन्नों में दफन हो गया, यहाँ तक कि उसके समर्थक भी उसका नाम इस्तेमाल नहीं करते। इसके विपरीत, इमाम हुसैन (अ.स) की शहादत ने उन्हें 'बक़ा' (अमरता) दे दी। आज पूरी दुनिया में उनके चाहने वाले मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि जीत हमेशा हक (सत्य) की होती है।
शायर ने "यज़ीद था हुसैन है" कहकर मौत और ज़िन्दगी (फ़ना और बक़ा) के बारे में क्या समझाया है?