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उठा दो पर्दा दिखा दो चेहरा के नूर ए बारी हिजाब में है Lyrics In हिन्दी

(उठा दो पर्दा दिखा दो चेहरा के नूर-ए-बारी हिजाब में है, ज़माना तारीक हो रहा है कि महर कब से नक़ाब में है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : उठा दो पर्दा दिखा दो चेहरा के नूर-ए-बारी हिजाब में है

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 03 Aug, 2023 03:06 PM IST

बार देखा गया : 206

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है,
ज़माना तारीक हो रहा है, कि महर कब से नक़ाब में है।

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है।

उन्हीं की बू माया-ए-सामान है, उन्हीं का जलवा चमन-चमन है,
उन्हीं से गुलशन महक रहे हैं, उन्हीं की रंगत गुलाब में है।

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है।

वो गुल हैं लब-हाए नाज़ुक उनके, हज़ारों चढ़ते हैं फूल उनसे,
गुलाब गुलशन में देखे बुलबुल, ये देख गुलशन गुलाब में है।

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है।

खड़े हैं मुनकर नक़ीर सर पर, न कोई हामी न कोई आवर,
बता दो आकर मेरे पैग़म्बर, कि सख्त मुश्किल जवाब में हैं।

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है।

करीम अपने करम का सदक़ा, लईम बेक़द्र को न शर्माँ,
तू और रज़ा से हिसाब लेना, रज़ा भी कोई हिसाब में है।

उठा दो पर्दा, दिखा दो चेहरा, के नूर-ए-बारी हिजाब में है,
ज़माना तारीक हो रहा है, कि महर कब से नक़ाब में है।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह अत्यंत भावपूर्ण नात-ए-पाक (आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान द्वारा रचित) हुज़ूर पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के नूरानी मुखड़े के दीदार की तड़प और क़ब्र की कठिन घड़ी में उनकी सहायता (शफ़ाअत) की मार्मिक पुकार को दर्शाती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे मेरे प्यारे नबी ﷺ! अब अपना पवित्र चेहरा दिखा दीजिए क्योंकि आपका रूप ईश्वर का नूर (नूर-ए-बारी) है जो अभी ओझल है, और आपके दीदार के बिना पूरी दुनिया अज्ञानता व निराशा के अंधकार में डूबी जा रही है। शायर कहता है कि संसार के सारे बाग-बगीचे और गुलाब की सुंदरता वास्तव में हुज़ूर ﷺ के ही नूर और सुगंध का सदक़ा हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
नूर-ए-बारीईश्वर (अल्लाह) का प्रकाश / नूर
हिजाबपर्दा / ओट
तारीकअंधकारमय / काला
महरसूर्य / सूरज
माया-ए-सामानजीवन की असली पूँजी या धन
मुनकर नक़ीरक़ब्र में सवाल पूछने वाले फ़रिश्ते
हामी / आवरमददगार / रक्षक या सहारा
लईमगुनहगार / कमतर या बेक़द्र

सारांश (Summary)

इस नात शरीफ़ का मुख्य सार यह है कि सृष्टि की समस्त सुंदरता नबी-ए-करेम ﷺ के नाज़ुक होठों और उनके सौंदर्य का प्रतिबिंब है। शायर 'रज़ा' अपनी मृत्यु के बाद का दृश्य याद करते हुए फ़रियाद करते हैं कि जब क़ब्र में मुनकर-नक़ीर परीक्षा लेने आएंगे और कोई मददगार नहीं होगा, तब नबी ﷺ स्वयं आकर अपने इस तुच्छ और गुनहगार सेवक की लाज रख लेंगे, क्योंकि उनके असीमित करम के आगे रज़ा जैसे पापी का हिसाब कोई मायने नहीं रखता।

लिरिक्स के पहले शेर के मुताबिक, ज़माना तारीक (अंधेरा) क्यों हो रहा है और किस को नक़ाब में बताया गया है?

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