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उनकी महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिए हैं Lyrics In हिन्दी

(उनकी महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिए हैं, जिस राह चल दिए हैं कूचे बसा दिए हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : उनकी महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिए हैं

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 02:17 PM IST

बार देखा गया : 562

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

उनकी महक ने दिल के ग़ुंचे खिला दिए हैं,
जिस राह चल दिए हैं कूचे बसा दिए हैं

एक दिल हमारा क्या है, आज़ार उसका कितना,
तुमने तो चलते-फिरते मुर्दे जगा दिए हैं

उनके निसार कोई कैसे ही रंज में हो,
जब याद आ गए हैं सब ग़म भुला दिए हैं

असरा में गुज़रे जिस दम बेड़े पे क़ुदसियों के,
होने लगी सलामी, परचम झुका दिए हैं

जब आ गई हैं जोश-ए-रहमत पे उनकी आँखें,
जलते बुझा दिए हैं, रोते हँसा दिए हैं

मेरे करीम से गर क़तरा किसी ने माँगा,
दरिया बहा दिए हैं, दुरबे बहा दिए हैं

अल्लाह रे! क्या जहन्नम अब भी न सर्द होगा,
रो-रो के मुस्तफ़ा ने दरिया बहा दिए हैं

मुल्क-ए-सुख़न की शाही तुम को रज़ा मुसल्लम,
जिस सिम्त आ गए हैं सिक्के बिठा दिए हैं

हम से फ़क़ीर भी अब सेहरी को उठते होंगे,
अब तो ग़नी के दर पर बिस्तर जमा दिए हैं

आने दो या डुबो दो, अब तो तुम्हारी जानिब,
कश्ती तुम्हीं पे छोड़ी, लंगर उठा दिए हैं

दूल्हा से इतना कह दो प्यारे सवारी रोको,
मुश्किल में हैं बराती, पुरख़ार ला दिए हैं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात-ए-पाक आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी की शाहकार रचनाओं में से एक है, जिसमें हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की अज़मत, उनके मोजिज़ात (चमत्कारों) और उनकी बेमिसाल रहमत व सख़ावत का ज़िक्र किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस कलाम का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ की आमद और उनकी याद से मुर्दा दिलों को नई ज़िंदगी मिलती है और बड़े से बड़ा ग़म दूर हो जाता है। शायर कहता है कि आप ﷺ की रहमत का दरिया इस क़दर वसीह (बड़ा) है कि मांगने वाले को क़तरे के बदले दरिया मिल जाता है और आख़िरत में आपकी शफ़ाअत ही उम्मत को जहन्नम की आग से बचाएगी।


शब्द-अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Hindi / English Meaning)
ग़ुंचेकली / शगूफ़ा (Flower Bud)
कूचेगलियाँ / मोहल्ले (Streets / Lanes)
आज़ारदुख, तकलीफ़ या बीमारी (Pain / Illness)
निसारक़ुर्बान होना / सदक़े जाना (Sacrificed / Devoted)
क़ुदसियोंफ़रिश्ते (Angels)
दुरबेदौलत के ढेर (Heaps of wealth)
मुल्क-ए-सुख़नशायरी और अदब की दुनिया (Kingdom of Poetry)
मुसल्लमस्वीकार किया हुआ / माना हुआ (Accepted / Conceded)
सिम्तदिशा / तरफ़ (Direction)
ग़नीदाता / सख़ी / धनवान (Generous / Wealthy)
लंगरकश्ती को रोकने का भारी लोहा (Anchor)
पुरख़ारकाँटों से भरा हुआ / मुश्किल रास्ता (Thorny / Difficult)

सारांश (Summary)

हुज़ूर ﷺ की ज़ात पूरी कायनात के लिए सरापा रहमत है; उनकी महक से दिलों के बाग़ खिल उठते हैं और उनके दर से कोई ख़ाली हाथ नहीं लौटता। आला हज़रत फ़रमाते हैं कि मुस्तफ़ा ﷺ के आंसू और उनकी दुआएं जहन्नम की आग को भी ठंडा कर देंगी, इसीलिए एक मोमिन ने अपनी आख़िरत और ज़िंदगी की कश्ती को पूरी तरह उन्हीं के सहारे छोड़ दिया है।

इस नात के मुताबिक, शायर ने अपनी ज़िंदगी की कश्ती का लंगर उठाकर उसे किस के सहारे छोड़ दिया है?

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