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तू शम्अ ए रिसालत है आलम तेरा परवाना Lyrics In हिन्दी

(तू शम्अ-ए-रिसालत है आलम तेरा परवाना, तू माह-ए-नुबूवत है ऐ जल्वा-ए-जानाना)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तू शम्अ-ए-रिसालत है आलम तेरा परवाना

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 30 Jul, 2023 10:44 AM IST

बार देखा गया : 347

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

तू शम्अ-ए-रिसालत है, आलम तेरा परवाना,
तू माह-ए-नुबूवत है, ऐ जल्वा-ए-जानाना।

जो साक़ी-ए-कौसर के चेहरे से नक़ाब उठे,
हर दिल बने मयख़ाना, हर आँख हो पैमाना।

दिल अपना चमक उठे, ईमान की दौलत से,
कर आँखें भी नूरानी, ऐ जल्वा-ए-जानाना।

पीते हैं तेरे दर का, खाते हैं तेरे दर का,
पानी है तेरा पानी, दाना है तेरा दाना।

संग-ए-दर-ए-जानाँ पर करता हूँ जबी साई,
सज्दा न समझ नजदी, सर देता हूँ नजराना।

सरकार के जल्वों से रौशन है दिल-ए-नूरी,
ता हश्र रहे रौशन, नूरी का ये काशाना।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह रसूल-ए-पाक ﷺ की शान में लिखी गई एक अत्यंत प्रसिद्ध और कालजयी नात-ए-पाक (मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद, हज़रत मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान 'नूरी' द्वारा रचित) है, जो नबी ﷺ की शाश्वत रौशनी, उनकी असीम उदारता और उनके प्रति अटूट प्रेम को दर्शाती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ! आप नुबूवत (पैग़म्बरी) की वह पवित्र शमा (दीपक) हैं, जिसके चारों ओर यह पूरा संसार परवाने की तरह मंडराता और दीवाना है। शायर प्रार्थना करता है कि उनके हृदय को ईमान की सच्ची दौलत से चमका दिया जाए और उनकी आँखों को नबी ﷺ के नूरानी दीदार से धन्य किया जाए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
शम्अ-ए-रिसालतपैग़म्बरी का दीपक / रौशनी
माह-ए-नुबूवतनुबूवत का चाँद
साक़ी-ए-कौसरहौज़-ए-कौसर का पवित्र पानी पिलाने वाले (नबी ﷺ)
मयख़ाना / पैमानामदिरालय और प्याला (यहाँ अर्थ आध्यात्मिक आनंद और प्रेम की प्रगाढ़ता से है)
संग-ए-दर-ए-जानाँमहबूब (नबी ﷺ) की चौखट का पत्थर
जबी साईमाथा रगड़ना / श्रद्धा से माथा टेकना
काशानाघर / आशियाना

सारांश (Summary)

इस नात का मुख्य सार यह है कि यह संपूर्ण सृष्टि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नबी ﷺ के ही दर से रिज़्क (दाना-पानी) पाती है और उन्हीं की कृपा पर निर्भर है। शायर स्पष्ट करता है कि नबी ﷺ की चौखट पर माथा टेकना कोई ग़लत इबादत या सजदा नहीं, बल्कि एक प्रेमी द्वारा अपने महबूब के चरणों में दिया गया सिर का नज़राना है। अंत में शायर 'नूरी' कामना करते हैं कि उनके दिल और घर का कोना-कोना प्रलय के दिन (ता-हश्र) तक सरकार ﷺ के दिव्य जल्वों से सदा रौशन रहे।

लिरिक्स के मुताबिक, पूरा आलम (जहान) किस का परवाना है?

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