रुख़ दिन है या महर-ए-समा ये भी नहीं वो भी नहीं
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टाइटल : Ramzan Aagaya Khuda Ka Inaam Aagaya
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : रिज़वान अहमद महबुबी
नातख्वान/कलाकार: रिज़वान अहमद महबुबी
जोड़ा गया : 24 Mar, 2023 02:40 AM IST
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हम पर खुदा ऐ ताला का इनाम आगया,
रमजान आगया, अरे रमजान आगया
जन्नत का दर खुला और जहन्नम का हुआ बंद,
हो जो खुश खुदा का यह फरमान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया
नफ्ले बराबर फ़र्ज़ के तो सत्तर गुनाह है फ़र्ज़,
बरकत खुद का लेके महे जीशान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया
नैमत खिलाए खूब हमको बदल बदल,
खुआ चल के पास अपने वो मेहमान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया
नज़रे उठाओ जिस तरफ रहमत है चार सु,
ऐ रिजवान रब का तुझपे फैज़ान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया