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रमजान आगया खुदा का इनाम आगया Lyrics In हिन्दी

(रमजान आगया खुदा का इनाम आगया, हम पर खुदाये ताला का इनाम आगया)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : रमजान आगया खुदा का इनाम आगया

श्रेणी (कटेगरी) : नज़्म के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : रिज़वान अहमद महबुबी

नातख्वान/कलाकार: रिज़वान अहमद महबुबी

जोड़ा गया : 24 Mar, 2023 02:42 AM IST

बार देखा गया : 191

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हम पर खुदा ऐ ताला का इनाम आगया,
रमजान आगया, अरे रमजान आगया

जन्नत का दर खुला और जहन्नम का हुआ बंद,
हो जो खुश खुदा का यह फरमान आगया

रमजान आगया, अरे रमजान आगया

नफ्ले बराबर फ़र्ज़ के तो सत्तर गुनाह है फ़र्ज़,
बरकत खुद का लेके महे जीशान आगया

रमजान आगया, अरे रमजान आगया

नैमत खिलाए खूब हमको बदल बदल,
खुआ चल के पास अपने वो मेहमान आगया

रमजान आगया, अरे रमजान आगया

नज़रे उठाओ जिस तरफ रहमत है चार सु,
ऐ रिजवान रब का तुझपे फैज़ान आगया

रमजान आगया, अरे रमजान आगया
रमजान आगया, अरे रमजान आगया

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नज़्म माहे-रमज़ान के आगमन पर मुसलमानों के बीच छाने वाली असीम ख़ुशी और इस पवित्र महीने की महानता को दर्शाती है। इसमें रमज़ान को अल्लाह का एक अनमोल उपहार और बरकतों का खज़ाना बताया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि रमज़ान का पवित्र महीना हमारे बीच आना साक्षात् ईश्वर (अल्लाह) का बहुत बड़ा पुरस्कार है। इस महीने के शुरू होते ही स्वर्ग (जन्नत) के द्वार खोल दिए जाते हैं और नर्क (जहन्नम) के द्वार बंद कर दिए जाते हैं; साथ ही इस महीने में एक नफ़ल (अतिरिक्त) इबादत का पुण्य फ़र्ज़ के बराबर और एक फ़र्ज़ का पुण्य सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दहिंदी अर्थ (Meaning)
खुदा-ए-तालासर्वोच्च ईश्वर / सर्वशक्तिमान अल्लाह
दर / फ़रमानदरवाज़ा या द्वार / आदेश या हुक्म
नफ़्ले (नफ़्ल)वह अतिरिक्त स्वैच्छिक प्रार्थना जो अनिवार्य न हो
महे ज़ीशानभव्य और ऊंचे गौरव वाला महीना
नैमत (नेमत)ईश्वर का उपहार या अच्छा भोजन
चार सूचारों ओर / हर तरफ
फ़ैज़ानअसीम कृपा / ईश्वरीय बरकत और लाभ

सारांश (Summary)

इस सुंदर कलाम का मूल सार यह है कि रमज़ान का महीना हमारे पास एक सम्मानित और प्यारे मेहमान की तरह आता है, जिसमें हमें तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस पावन समय में इंसान जिस तरफ भी देखता है, उसे अल्लाह की दया (रहमत) दिखाई देती है। शायर 'रिज़वान' कहते हैं कि अल्लाह के इस आदेश से सभी को आनंदित होना चाहिए, क्योंकि यह महीना स्वयं को गुनाहों से पवित्र करने का सर्वोत्तम अवसर है।

लिरिक्स के मुताबिक, रमज़ान के महीने में नफ़ल और फ़र्ज़ इबादत का सवाब कितना बढ़ जाता है?

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