मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Ramzan Aagaya Khuda Ka Inaam Aagaya
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : रिज़वान अहमद महबुबी
नातख्वान/कलाकार: रिज़वान अहमद महबुबी
जोड़ा गया : 24 Mar, 2023 02:42 AM IST
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Hum Par Khuda E Tala Ka Inaam Aagaya,
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
Jannat Ka Dar Khula Aur Jahannam Ka Hua Band,
Ho Jao Khush Khuda Ka Yeh Farman Aagaya
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
Nafle Barabar Farz Ke Toh Sattar Gunah Hai Farz,
Barkat Khuda Ki Leke Mahe Jeeshan Aagaya
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
Naemat Khilaye Khub Humko Badal Badal,
Khud Chal Ke Pass Apne Woh Mehman Aagaya
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
Nazre Uthao Jis Taraf Rehmat Hai Char Su,
Aye Rizwan Rab Ka Tujhpe Faizan Aagaya
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
Ramzan Aagaya, Are Ramzan Aagaya
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यह नज़्म माहे-रमज़ान के आगमन पर मुसलमानों के बीच छाने वाली असीम ख़ुशी और इस पवित्र महीने की महानता को दर्शाती है। इसमें रमज़ान को अल्लाह का एक अनमोल उपहार और बरकतों का खज़ाना बताया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि रमज़ान का पवित्र महीना हमारे बीच आना साक्षात् ईश्वर (अल्लाह) का बहुत बड़ा पुरस्कार है। इस महीने के शुरू होते ही स्वर्ग (जन्नत) के द्वार खोल दिए जाते हैं और नर्क (जहन्नम) के द्वार बंद कर दिए जाते हैं; साथ ही इस महीने में एक नफ़ल (अतिरिक्त) इबादत का पुण्य फ़र्ज़ के बराबर और एक फ़र्ज़ का पुण्य सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| खुदा-ए-ताला | सर्वोच्च ईश्वर / सर्वशक्तिमान अल्लाह |
| दर / फ़रमान | दरवाज़ा या द्वार / आदेश या हुक्म |
| नफ़्ले (नफ़्ल) | वह अतिरिक्त स्वैच्छिक प्रार्थना जो अनिवार्य न हो |
| महे ज़ीशान | भव्य और ऊंचे गौरव वाला महीना |
| नैमत (नेमत) | ईश्वर का उपहार या अच्छा भोजन |
| चार सू | चारों ओर / हर तरफ |
| फ़ैज़ान | असीम कृपा / ईश्वरीय बरकत और लाभ |
इस सुंदर कलाम का मूल सार यह है कि रमज़ान का महीना हमारे पास एक सम्मानित और प्यारे मेहमान की तरह आता है, जिसमें हमें तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस पावन समय में इंसान जिस तरफ भी देखता है, उसे अल्लाह की दया (रहमत) दिखाई देती है। शायर 'रिज़वान' कहते हैं कि अल्लाह के इस आदेश से सभी को आनंदित होना चाहिए, क्योंकि यह महीना स्वयं को गुनाहों से पवित्र करने का सर्वोत्तम अवसर है।
लिरिक्स के मुताबिक, रमज़ान के महीने में नफ़ल और फ़र्ज़ इबादत का सवाब कितना बढ़ जाता है?