اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
- 1 महीना पहले fiber_manual_record 141 बार देखा गया
टाइटल : Noor Wala Aaya Hai
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : मौलाना मुहम्मद इलियास अत्तार कादरी रज़वी
नातख्वान/कलाकार: फरहान अली कादरी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 06:37 PM IST
बार देखा गया : 1.4K
Time to read: 5 min read
translate बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे,
तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
नात-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे,
या रसूलल्लाह का नारा लगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
जश्न-ए-मीलाद-ए-मुबारक कैसे छोड़ें हम भला,
जिन का खाते हैं उन्हीं के गीत गाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे,
घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
ईदे-ए-मीलादुन्नबी की शब चराग़ाँ कर के हम,
क़ब्र नूर-ए-मुस्तफ़ा से जगमगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
तुम करो जश्न-ए-विलादत की ख़ुशी में रौशनी,
वो तुम्हारी गोर-ए-तीरा जगमगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
हश्र में ज़ेर-ए-लिवा-ए-हम्द, ऐ अत्तार हम,
नात-ए-सुल्तान-ए-मदीना गुनगुनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
बहर-ए-बख़्शिश पास अपने कुछ नहीं इस के सिवा,
उम्र-भर नतें सुनेंगे और सुनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
नात-ख़्वानी मौत भी हम से छुड़ा सकती नहीं,
क़ब्र में भी मुस्तफ़ा के गीत गाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
या रसूलल्लाह के नारे से हम को प्यार है,
हम ने ये नारा लगाया अपना बेड़ा पार है
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह