मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : नूर वाला आया है नूर ले कर आया है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : मौलाना मुहम्मद इलियास अत्तार कादरी रज़वी
नातख्वान/कलाकार: फरहान अली कादरी हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 19 Aug, 2023 06:39 PM IST
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नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
जब तलक ये चाँद-तारे झिलमिलाते जाएँगे,
तब तलक जश्न-ए-विलादत हम मनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
नात-ए-महबूब-ए-ख़ुदा सुनते सुनाते जाएँगे,
या रसूलल्लाह का नारा लगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
जश्न-ए-मीलाद-ए-मुबारक कैसे छोड़ें हम भला,
जिन का खाते हैं उन्हीं के गीत गाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
चार जानिब हम दिये घी के जलाते जाएँगे,
घर तो घर सारे मुहल्ले को सजाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
ईदे-ए-मीलादुन्नबी की शब चराग़ाँ कर के हम,
क़ब्र नूर-ए-मुस्तफ़ा से जगमगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
तुम करो जश्न-ए-विलादत की ख़ुशी में रौशनी,
वो तुम्हारी गोर-ए-तीरा जगमगाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
हश्र में ज़ेर-ए-लिवा-ए-हम्द, ऐ अत्तार हम,
नात-ए-सुल्तान-ए-मदीना गुनगुनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
बहर-ए-बख़्शिश पास अपने कुछ नहीं इस के सिवा,
उम्र-भर नतें सुनेंगे और सुनाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
नात-ख़्वानी मौत भी हम से छुड़ा सकती नहीं,
क़ब्र में भी मुस्तफ़ा के गीत गाते जाएँगे
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
या रसूलल्लाह के नारे से हम को प्यार है,
हम ने ये नारा लगाया अपना बेड़ा पार है
नूर वाला आया है, नूर ले कर आया है,
सारे आलम में ये देखो कैसा नूर छाया है
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या रसूलल्लाह,
अस्सलातु व-स्सलामु अलैका या हबीबल्लाह
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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की विलादत (जन्म) की ख़ुशी और दुनिया में उनके नूर के आगमन का सुंदर वर्णन है, जिसमें भक्त अपनी अटूट आस्था और ईदे-मीलाद मनाने के संकल्प को दोहराते हैं।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब तक यह दुनिया और आकाश के चाँद-तारे रहेंगे, तब तक हुज़ूर ﷺ के आने का जश्न मनाया जाता रहेगा। शायर कहता है कि जो भक्त दुनिया में उनकी याद में रौशनी और चराग़ाँ करते हैं, आक़ा ﷺ उनकी अंधेरी क़ब्र को अपने नूर से रोशन कर देते हैं।
| शब्द | अर्थ (हिंदी / English) |
|---|---|
| सारे आलम | पूरी दुनिया / Entire Universe |
| जश्न-ए-विलादत | जन्म का उत्सव / Celebration of birth |
| चार जानिब | चारों दिशाओं में / In all four directions |
| गोर-ए-तीरा | अंधेरी क़ब्र / Dark grave |
| बहर-ए-बख़्शिश | मोक्ष या क्षमा के लिए / For the sake of forgiveness |
| ज़ेर-ए-लिवा-ए-हम्द | प्रशंसा के झंडे के नीचे / Under the banner of praise |
हुज़ूर ﷺ 'नूर' बनकर आए हैं और उनकी नात पढ़ना और मीलाद मनाना ही एक मोमिन की बख़्शिश (मुक्ति) का ज़रिया है। शायर 'अत्तार' का मानना है कि नबी ﷺ की मोहब्बत और उनकी नात-ख़्वानी का सिलसिला मौत के बाद क़ब्र में भी जारी रहेगा, क्योंकि उन्हीं के नाम के सहारे भक्तों का बेड़ा पार होना है।
शायर के मुताबिक, मिलाद की खुशी में रोशनी करने से 'गोर-ए-तीरा' (अंधेरी क़ब्र) पर क्या असर होगा?