اندھیری رات ہے غم کی گھٹا عصیاں کی کالی ہے
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टाइटल : Mustafa Mustafa Mustafa
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 29 Sep, 2023 07:50 AM IST
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Mustafa Mustafa Mustafa
Mustafa Mustafa Mustafa
Jo Bagawat Kare Mere Sarkar Se
Uski Gardan Uda Dunga Talwar Se
Bole Farooqu E Aazam Yeh Kuffar Se
Aao Aao Idhar Tum Bhi Keh Do Zara
Mustafa Mustafa Mustafa
Mustafa Mustafa Mustafa
Meri Aankhe Tarsti Hai Deedar Ko
Dekh Loon Main Kabhi Apne Sarkar Ko
Gar Woh Aayen Nazar Is Gunhegar Ko
Toh Chum Lunge Yeh Aankhe Kehte Huye
Mustafa Mustafa Mustafa
Mustafa Mustafa Mustafa
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यह पंक्तियाँ हज़रत उमर फ़ारूक़ (र.अ.) की वीरता और एक प्रेमी की अपने आक़ा ﷺ के दीदार की तड़प को दर्शाती हैं।
इन पंक्तियों में बताया गया है कि हज़रत उमर (र.अ.) ने दुश्मनों को ललकारते हुए कहा था कि जो नबी ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करेगा, उसे कड़ी सज़ा दी जाएगी। दूसरे भाग में शायर अपनी दिली तमन्ना ज़ाहिर करता है कि उसकी गुनहगार आँखों को कभी हुज़ूर ﷺ के दर्शन नसीब हों, तो वह उन आँखों को चूम ले।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बग़ावत | विद्रोह या आदेश न मानना |
| फ़ारूक़-ए-आज़म | हज़रत उमर (र.अ.) की उपाधि (सत्य और असत्य में अंतर करने वाले) |
| कुफ़्फ़ार | इनकार करने वाले (अविश्वासी) |
| दीदार | दर्शन या देखना |
| गुनहगार | पापी या त्रुटि करने वाला |
इस कलाम का सार यह है कि इस्लाम की रक्षा के लिए सहाबा-ए-कराम का जज्बा बहुत महान था और वे नबी ﷺ की इज़्ज़त पर मर मिटने को तैयार रहते थे। साथ ही, यह पंक्तियाँ एक मोमिन के दिल की उस तड़प को भी बयान करती हैं जहाँ वह अपनी तमाम गलतियों के बावजूद सिर्फ हुज़ूर ﷺ के नूरानी चेहरे को एक बार देखने की आरज़ू रखता है।
शायर ने हज़रत उमर फ़ारूक़ (र.अ.) का ज़िक्र किस पसमंज़र (संदर्भ) में किया है?