मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
- 1 दिन पहले fiber_manual_record 59 बार देखा गया
टाइटल : मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 29 Sep, 2023 07:50 AM IST
बार देखा गया : 2.3K
Time to read: 1 min read
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
जो बगावत करे मेरे सरकार से
उसकी गर्दन उड़ा दूंगा तलवार से
बोले फारुख ए आजम ये कुफ्फार से
आओ आओ इधर तुम भी कह दो जरा
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
मेरी आँखे तरसती है दीदार को
देख लूं मैं कभी अपनी सरकार को
गर वो आयें नज़र इस गुनहेगर को
तो चूम लूँगा ये आँखे कहते हुए
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
मुस्तफा मुस्तफा मुस्तफा
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह पंक्तियाँ हज़रत उमर फ़ारूक़ (र.अ.) की वीरता और एक प्रेमी की अपने आक़ा ﷺ के दीदार की तड़प को दर्शाती हैं।
इन पंक्तियों में बताया गया है कि हज़रत उमर (र.अ.) ने दुश्मनों को ललकारते हुए कहा था कि जो नबी ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करेगा, उसे कड़ी सज़ा दी जाएगी। दूसरे भाग में शायर अपनी दिली तमन्ना ज़ाहिर करता है कि उसकी गुनहगार आँखों को कभी हुज़ूर ﷺ के दर्शन नसीब हों, तो वह उन आँखों को चूम ले।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बग़ावत | विद्रोह या आदेश न मानना |
| फ़ारूक़-ए-आज़म | हज़रत उमर (र.अ.) की उपाधि (सत्य और असत्य में अंतर करने वाले) |
| कुफ़्फ़ार | इनकार करने वाले (अविश्वासी) |
| दीदार | दर्शन या देखना |
| गुनहगार | पापी या त्रुटि करने वाला |
इस कलाम का सार यह है कि इस्लाम की रक्षा के लिए सहाबा-ए-कराम का जज्बा बहुत महान था और वे नबी ﷺ की इज़्ज़त पर मर मिटने को तैयार रहते थे। साथ ही, यह पंक्तियाँ एक मोमिन के दिल की उस तड़प को भी बयान करती हैं जहाँ वह अपनी तमाम गलतियों के बावजूद सिर्फ हुज़ूर ﷺ के नूरानी चेहरे को एक बार देखने की आरज़ू रखता है।
शायर ने हज़रत उमर फ़ारूक़ (र.अ.) का ज़िक्र किस पसमंज़र (संदर्भ) में किया है?