मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मुझ ख़ता कार सा इंसान मदीने में रहे
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : आज़म चिश्ती
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 19 Mar, 2023 12:51 PM IST
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मुझ ख़ता कार सा इंसान मदीने में रहे
बन के सरकार का मेहमान मदीने में रहे
दूर रह कर भी उठाता हो हज़ूरी के मज़े
मैं यहाँ हूँ और मेरी जान मदीने में रहे
अल्लाह अल्लाह सरअफ़ज़ाई सहराए हिजाज़
सारी मख़्लूक़ का सुल्तान मदीने में रहे
उनकी उल्फ़त ग़मे कौनेन भुला देती है
जितने दिन का मेहमान मदीने में रहे
छोड़ आया हूँ दिल-ओ-जान ये कह कर अज़म
आ रहा हूँ मेरा सामान मदीने में रहे
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यह आशिक़-ए-रसूल के दिल की तड़प और मदीने से अटूट लगाव को दर्शाती एक बेहद भावुक और रूहानी नात शरीफ़ है। इसमें एक गुनाहगार बंदा हुज़ूर ﷺ का स्थाई मेहमान बनने और मदीना शरीफ़ में ही ज़िंदगी गुज़ारने की आरज़ू कर रहा है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि "मुझ जैसा भटका हुआ और गुनाहगार (ख़ताकार) इंसान भी मदीना शरीफ़ में रहे और प्यारे आक़ा ﷺ का आदरणीय मेहमान बनने का सौभाग्य पाए।" शायर कहता है कि भले ही मेरा शरीर भौतिक रूप से मदीने से दूर इस दुनिया में है, लेकिन मेरी रूह और मेरी जान हमेशा मदीना मुनव्वरा में ही बसी रहे ताकि मैं दूर रहकर भी वहाँ की उपस्थिति (हज़ूरी) का आध्यात्मिक आनंद ले सकूँ।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| ख़ता कार | गुनाहगार / गलतियाँ करने वाला इंसान |
| हज़ूरी | पवित्र दरबार में उपस्थिति या हाज़िरी का अहसास |
| सरअफ़ज़ाई | सम्मान बढ़ाना / सरबुलंदी या गौरव |
| सहराए हिजाज़ | हिजाज़ (अरब) का रेगिस्तान या मरुभूमि |
| मख़्लूक़ / सुल्तान | समस्त सृष्टि या जीव-जंतु / राजा या सम्राट |
| उल्फ़त | प्रेम / गहरी मोहब्बत |
| ग़मे कौनेन | दोनों जहानों (इस लोक और परलोक) का दुःख |
इस सुंदर नात का मूल सार यह है कि मदीने की भूमि का सम्मान बहुत ऊँचा है क्योंकि वहाँ सारी सृष्टि के राजा यानी हुज़ूर मुहम्मद ﷺ विश्राम कर रहे हैं। नबी ﷺ का प्रेम और उनकी याद इंसान को दोनों जहान के सारे दुखों से आज़ाद कर देती है। शायर 'अज़म' कहते हैं कि मदीने से वापस लौटते समय वह अपनी आत्मा और दिल वहीं छोड़ आए हैं, और यहाँ केवल अपना शरीर लेकर वापस आए हैं क्योंकि उनका असली ठिकाना अब वही पावन नगरी है।
शायर के मुताबिक, नबी ﷺ की उल्फ़त (मोहब्बत) इंसान को किस दुख से आज़ाद कर देती है और वह मदीना छोड़ते वक्त वहाँ क्या रख कर आया है?