मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मेरे आका आये झूमो
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : मौलाना मुहम्मद इलियास अत्तार कादरी रज़वी
नातख्वान/कलाकार: फरहान अली कादरी ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 22 Sep, 2023 07:19 AM IST
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मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
प्यारे आका आये झूमो,
मेरे मौला आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
ईद-ए-मिलाद उन नबी है दिल बड़ा मसरूर है,
ईद दीवानों की तो बारा रबी उन नूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे हामी आये झूमो,
मेरे यावर आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
इस तरफ जो नूर है तो उस तरफ भी नूर है,
ज़र्रा ज़र्रा सब जहां का नूर से मशहूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
सरकार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा,
गमख्वार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे हामी आये झूमो,
मेरे यावर आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
हर मलक है शादमान खुश आज हर एक हूर है,
हां मगर शेतान बहम रूफका बड़ा रंजूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
सरकार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा,
सब झूम के बोलो मरहबा,
सब मिल कर बोलो मरहबा,
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे हामी आये झूमो,
मेरे यावर आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
आमद-ए-सरकार से दिल मस्त है काफूर है,
क्या ज़मीन क्या आसमां हर सिम्त छाया नूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
सरकार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा,
गमख़्वार की आमद मरहबा,
अनवर की आमद मरहबा,
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो
जश्न-ए-मिलाद उन नबी हैं क्यों ना झूमें आज हम,
मुस्कुराती हैं बहारें सब फ़ज़ा पुरनूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो
सरकार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा,
सब मिल कर बोलो मरहबा,
आक़ा की आमद मरहबा
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे हामी आये झूमो,
मेरे यावर आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
गम के बादल छट गए हर गम का मारा झूम उठा,
आ गया खुशियां लिए माह-ए-रबी उन नूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
आमिना तुझको मुबारक शाह की मिलाद हो,
तेरा आंगन नूर बलके घर का घर सब नूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
सरकार की आमद मरहबा,
दिलदार की आमद मरहबा,
गमख़्वार की आमद मरहबा,
सरकार की आमद मरहबा,
सब मिल कर बोलो मरहबा,
हुजूर की आमद मरहबा
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
हूं गुलाम-ए-मुस्तफा अत्तार का दावा है ये,
काश अका भी ये फरमायें हमें मंजूर है
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
सबके दाता आये झूमो,
सबके मौला आये झूमो
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो,
मेरे आका आये झूमो,
मेरे दाता आये झूमो
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यह कलाम ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ﷺ की खुशी और उनके आने के जश्न का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि नबी ﷺ की आमद से कायनात का हर कोना नूर से भर गया है और गम के बादल छट गए हैं।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि 12 रबी-उल-अव्वल की तारीख आशिकों के लिए सबसे बड़ी ईद है। हुज़ूर ﷺ के आने पर जहाँ ज़मीन, आसमान, हूरें और फरिश्ते खुशी मना रहे हैं, वहीं शैतान और उसके साथी दुखी हैं। शायर कहता है कि आमिना बी के आँगन में वह नूर आया है जिसने पूरी दुनिया को खुशियों से भर दिया है।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| मसरूर | बहुत खुश (Joyful) |
| हामी / यावर | मददगार (Helper/Supporter) |
| मलक | फरिश्ता (Angel) |
| रंजूर | दुखी या गमगीन (Grieved) |
| सिम्त | दिशा (Direction) |
| गमख़्वार | दुख बाँटने वाला (Sympathizer) |
इस नात का मुख्य संदेश नबी ﷺ की आमद पर खुशी मनाना और उनके प्रति अपनी वफादारी का इज़हार करना है। शायर 'अत्तार' खुद को उनका गुलाम कहते हैं और यह कामना करते हैं कि उनकी यह गुलामी बारगाह-ए-नबवी में कुबूल हो जाए। यह कलाम सिखाता है कि हुज़ूर ﷺ ही पूरी दुनिया के असली दाता और सहारा हैं।
इस नात के मुताबिक, सरकार ﷺ की आमद पर "फ़रिश्ते और हूरें" खुश हैं, मगर कौन "रंजूर" (दुखी) है?