मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मेरा नबी लाजवाब है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 16 Oct, 2023 03:13 PM IST
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मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
सबसे औला व आला हमारा नबी
सबसे बाला व आला हमारा नबी
अपने मौला का प्यारा हमारा नबी
दोनों आलम का दूल्हा हमारा नबी
जिसके तलवों का धोवन है आबे हयात
वो जाने मसीहा हमारा नबी
जिसकी दो बूंद है कौसर ओ सल सबील
है वो रहमत का दरिया हमारा नबी
खलक से औलिया औलिया से रसूल
और रसूलो से आला हमारा नबी
तो क्या खबर कितने तारे खिले छुफ गए
पर ना डूबे ना डूबा हमारा नबी
मूलके कौनेन मैं अँबिया ताजदार
तजदारों का आक़ा हमारा नबी
सारे ऊँचों में ऊंचा समझिए जिसे
सारे उन ऊँचों से ऊंचा हमारा नबी
सारे अच्छों में अच्छा समझिए जिसे
है उस अच्छों से अच्छा हमारा नबी
गम ज़दों को रज़ा मुज़दा दीजिए के है
बेकसों का सहारा हमारा नबी
कौन देता है देने को मुंह चाहिये
देने वाला है सच्चा हमारा नबी
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
अल्लाह के हबीब का चेहरा है लाजवाब
यानि खुदा का नूरे सराफा है लाजवाब
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
जन्नत में यह कहेंगे गुलमाने मुस्तफा
मेरे नबी का गुंबदे खज़रा है लाजवाब
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
नीचे करू निगाह के गुजरेगी फातिमा
ऐ अहले महशर ज़हरा का परदा है लाजवाब
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
मेरा नबी लाजवाब है, मेरा नबी लाजवाब है
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यह नातिया कलाम इमाम अहमद रज़ा खान क़ादरी (रह.) के प्रसिद्ध अशआर पर आधारित है, जो हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की बेमिसाल अज़मत और उनके सर्वोच्च मर्तबे का गुणगान करता है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हमारे नबी ﷺ का स्थान समस्त सृष्टि, वलियों और यहाँ तक कि अन्य सभी नबियों से भी श्रेष्ठ और ऊँचा है। शायर कहता है कि आप ﷺ दोनों जहानों की रौनक (दूल्हा) हैं और आपकी रहमत का दरिया इतना विशाल है कि जन्नत की नदियाँ (कौसर और सलसबील) उस दरिया की मात्र दो बूंदों के समान हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| औला व आला | श्रेष्ठ और सर्वोच्च |
| आबे हयात | वह जल जिसे पीकर अमर हो जाएँ |
| खलक | सृष्टि या मखलूक |
| मुज़दा | खुशखबरी |
| ताजदार | राजा या सम्राट |
| नूरे सरापा | सिर से पाँव तक नूर (प्रकाश) |
| गुंबदे खज़रा | मस्जिद-ए-नबवी का हरा गुंबद |
इस नात का सार यह है कि ईश्वर के बाद यदि कोई सबसे दयालु, सुंदर और सच्चा दाता है, तो वह हमारे नबी ﷺ हैं। वे न केवल दुखी और बेसहारा लोगों का सहारा हैं, बल्कि कयामत के दिन भी उनकी शफ़ाअत (सिफारिश) ही काम आएगी। शायर ने यह स्पष्ट किया है कि पूरी कायनात में आप ﷺ जैसा 'लाजवाब' और बेमिसाल कोई दूसरा नहीं है।
शायर ने नबी ﷺ को "बेकसों का सहारा" और "सच्चा देने वाला" क्यों कहा है?