सदाए गुम्बद-ए-ख़ज़रा हुसैन जीत गए
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टाइटल : Meetha Meetha Hai Mere Muhammad Ka Naam
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) सलात ओ सलाम के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 08 Apr, 2023 09:17 AM IST
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Meetha Meetha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Un Pe Lakhon Karodon Durood O Salam
Jisne Aake Sawaara Hai Daarain Ko
Jiski Rehmat Ne Dhanpa Hai Kaunain Ko
Jiske Dum Se Hi Yeh Raunaken Hain Tamam
Un Pe Lakhon Karodon Durood O Salam
Meetha Meetha Hai Mere Muhammad Ka Naam
La Makaan Ke Bane Hain Wohi To Makeen
Jin Ki Naalain Ko Choome Arsh-E-Bareen
Jo Khuda Se Huwe Arsh Par Hum Kalaam
Un Pe Laakhon Karodon Durood O Salam
Meetha Meetha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Waqt Laaye Khuda Jaaye Darbaar Par
Aur Khade Ho Ke Roza-E-Sarkar Par
Pesh Mil Kar Kare Hum Durood O Salaam
Unpe Lakhon Karodon Durood O Salam
Mitha Mitha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Ek Khuda Ki Raza Jis Ka Maqsood Tha
Zulm Sehta Raha Shukr Karta Raha
Jis Ke Sabr O Tahammul Ke Charche Hain Aam
Unpe Lakhon Karodon Darood O Salam
Mitha Mitha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Shah-E-Konain Woh Ruh-E-Daarain Woh
Fakhr-E-Hasnain Woh Ghaus-E-Sakalain Woh
Jin Ke Dar Ka Hai Hafiz Bhi Adnaa Ghulaam
Unpe Lakhon Karodon Durood O Salaam
Mitha Mitha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Wohi Hasni Hussain Chaman Ke Hain Phool
Noor-E-Maula Ali Jaan-E-Zahra Batool
Jis Ke Nana Rasool-E-Khuda Zi Makaan
Unpe Lakhon Karodon Durood O Salam
Meetha Meetha Hai Mere Muhammad Ka Naam
Un Pe Lakhon Karodon Durood O Salam
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यह मधुर और सुप्रसिद्ध नात शरीफ़ नबी-ए-करीम ﷺ के पावन नाम की मिठास, उनके धैर्य और उनकी सर्वोच्च आध्यात्मिक महिमा का एक सुंदर गान है। इसमें अत्यंत प्रेम और श्रद्धा के साथ आक़ा ﷺ की बारगाह में अनगिनत दुरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ का नाम दिल को असीम शांति और मिठास देने वाला है, जिन्होंने इस संसार और परलोक (दारैन) दोनों को अपनी शिक्षाओं से सँवारा है। वे ऐसी महान हस्ती हैं जिनकी पवित्र जूतियों (नालैन) को अर्श-ए-बरीं चूमता है और जिन्हें ईश्वर ने स्वयं आकाश से परे (ला-मकाँ) बुलाकर सीधे बातचीत (हमकलाम) करने का गौरव प्रदान किया।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| दारैन | दोनों जहान (यह लोक और परलोक) |
| कौ़नैन | संपूर्ण ब्रह्मांड / पूरी सृष्टि |
| ला-मकाँ | स्थान से परे का लोक (अर्श या दिव्य लोक) |
| मकीं | रहने वाला / निवासी |
| हमकलाम | आपस में बातचीत करने वाला |
| मक़सूद | उद्देश्य / एकमात्र लक्ष्य |
| तहम्मुल | सहनशीलता / धीरज या बर्दाश्त |
| सक़लैन | मानव और जिन्नात (दोनों सृष्टियाँ) |
इस कलाम का मुख्य सार यह है कि हुज़ूर ﷺ ही पूरी सृष्टि की रौनकों का मूल आधार हैं, जिन्होंने केवल ईश्वर की प्रसन्नता (रज़ा) के लिए जीवन में हर प्रकार के कष्ट और ज़ुल्म सहे और सदैव ईश्वर का शुक्र अदा किया। शायर 'हाफ़िज़' ईश्वर से विनती करते हैं कि उन्हें आक़ा ﷺ के पावन रौज़े पर साक्षात् खड़े होकर सलाम पढ़ने का सौभाग्य मिले। अंत में, हसनैन करीमैन (इमाम हसन और हुसैन), हज़रत अली और माता फ़ातिमा (ज़हरा बतूल) के साथ आक़ा ﷺ के पवित्र घराने (अहल-ए-बैत) के प्रति भी गहरी अक़ीदत व्यक्त की गई है।
शायर के मुताबिक किस अज़ीम ज़ात ने ख़ुदा की रज़ा के लिए जुल्म सह कर भी सब्र-ओ-तहामुल का मुज़ाहिरा किया, और उन्होंने रौज़ा-ए-सरकार पर खड़े होकर क्या करने की ख़्वाहिश की है?