मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात
जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 01:57 PM IST
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मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है,
बस मेरा मुद्दआ मदीना है
मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है,
उठ के जाऊँ कहाँ मदीने से,
क्या कोई दूसरा मदीना है
मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है,
दिल में अब कोई आरज़ू ही नहीं,
या मुहम्मद है या मदीना है
मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है,
उसकी आँखों का नूर तो देखो,
जिसका देखा हुआ मदीना है
मैं क्या बताऊँ कि क्या मदीना है,
दिल फ़िदा है मदीने वाले पर,
दिल मुनव्वर! मेरा मदीना है
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यह नात-ए-पाक हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के मुक़द्दस शहर मदीना मुनव्वरा की अज़मत और वहाँ मिलने वाले असीम रूहानी सुकून का बेहद ख़ूबसूरत बयान है।
इस कलाम का अर्थ है कि मदीना शरीफ़ की शान और शर्फ़ लफ़्ज़ों में बयान करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि एक आशिक़ के जीने का मक़सद ही मदीना है। शायर कहता है कि मदीने को छोड़कर कहीं और जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि पूरी दुनिया में मदीने जैसा दूसरा कोई मुक़ाम नहीं है और इसे देखने वाले की आँखों में एक अनोखा रूहानी नूर आ जाता है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Hindi / English Meaning) |
|---|---|
| मुद्दआ | मक़सद, इच्छा या आरज़ू (Purpose / Intent) |
| आरज़ू | तमन्ना या ख़्वाहिश (Wish / Desire) |
| नूर | रौशनी या चमक (Divine Light / Radiance) |
| फ़िदा | क़ुर्बान होना या न्योछावर होना (Sacrificed / Devoted) |
| मुनव्वर | रौशन या चमकदार (यहाँ शायर का नाम भी है) (Illuminated) |
मदीना मुनव्वरा वह पावन नगरी है जहाँ पहुँचने के बाद इंसान के दिल से दुनिया की तमाम ख़्वाहिशें ख़त्म हो जाती हैं और दिल सिर्फ़ 'या मुहम्मद' के ज़िक्र से आबाद हो जाता है। शायर 'मुनव्वर' फ़रमाते हैं कि उनका दिल मदीने वाले आक़ा पर क़ुर्बान है और उनके लिए दुनिया व आख़िरत की सबसे बड़ी जागीर और सुकून का सिरा सिर्फ़ मदीना ही है।
इस नात के मुताबिक, जिस शख़्स ने अपनी आँखों से मदीना देखा है, उसकी आँखों में किस चीज़ का इज़ाफ़ा हो जाता है?