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कुछ ऐसा कर दे मेरे क़िर्दिगार आँखों में Lyrics In हिन्दी

(कुछ ऐसा कर दे मेरे क़िर्दिगार आँखों में, हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : कुछ ऐसा कर दे मेरे क़िर्दिगार आँखों में

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 30 Jul, 2023 10:55 AM IST

बार देखा गया : 158

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

कुछ ऐसा कर दे मेरे क़िर्दिगार आँखों में
हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

वो नूर दे मेरे परवरदिगार आँखों में,
कि जल्वागर रहे रुख़ की बहार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

नज़र हो क़दमों पे उनके निसार आँखों में,
बनाएँ अपना हूँ वो रहगुज़ार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

बसर के साथ बसीरत भी खूब रोशन हो,
लगाऊँ ख़ाक-ए-क़दम बार-बार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

उन्हें न देखा तो किस काम की ये आँखें,
कि देखने की है सारी बहार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

मिले जो ख़ाक-ए-क़दम उनकी मुझको क़िस्मत से,
लगाऊँ सूरमा न फिर ज़े-नज़र आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

फ़रिश्तों पूछते हो मुझसे किसकी उम्मत हो,
लो देख लो ये है तसवीर-ए-यार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

पिया है जाम-ए-मोहब्बत जो आपने नूरी,
हमेशा उसका रहेगा ख़ुमार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

कुछ ऐसा कर दे मेरे क़िर्दिगार आँखों में,
हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

वही मुझे नज़र आए जिधर निगाह करूँ,
उन्हीं का जल्वा रहे आशकार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

ये दिल तड़प के कहे आँखों में न आ जाए,
कि फिर रहा है किसी का मज़ार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

फिर आएँ दिन मेरे अख़्तर शब-ए-हज़ूरी में,
करम से जल्वा करे जब निगार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

निगाह-ए-मुफ्ती-ए-आज़म की है ये जल्वागिरी,
चमक रहे हैं जो अख़्तर हज़ार आँखों में।

हमेशा नक़्श रहे रू-ए-यार आँखों में।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह रूहानी और बेहद खूबसूरत कलाम (ताजुशशरिया हज़रत अख़्तर रज़ा ख़ान बरेलवी द्वारा रचित) एक सच्चे आशिक-ए-रसूल के दिल की तड़प और नबी-ए-करीम ﷺ के दीदार की चाहत को बयां करता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे मेरे पालनहार (अल्लाह)… मेरी आँखों को ऐसा नूर (प्रकाश) अता कर दे कि जिधर भी मेरी नज़र जाए, मुझे केवल मेरे प्यारे नबी ﷺ का हसीन चेहरा और उनका जल्वा ही दिखाई दे। शायर की यह आरज़ू है कि उसकी आँखों की बाहरी रोशनी (बसर) के साथ-साथ दिल की रोशनी (बसीरत) भी इतनी तेज़ हो जाए कि वह नबी की यादों में पूरी तरह डूब जाए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
क़िर्दिगार / परवरदिगारईश्वर / सबका पालन-पोषण करने वाला खुदा
नक़्शछपा हुआ / स्थायी रूप से बसा हुआ
रू-ए-यारमहबूब (नबी ﷺ) का पवित्र चेहरा
जल्वागरप्रकट होना / सुशोभित होना
बसीरतअंतर्दृष्टि / मन की आँखें या रूहानी रोशनी
ख़ाक-ए-क़दमपैरों की धूल
आशकारसाफ़ दिखाई देना / ज़ाहिर होना
शब-ए-हज़ूरीनबी ﷺ के सानिध्य या दीदार की रात

सारांश (Summary)

इस नात का मुख्य सार यह है कि पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के दीदार के बिना इन आँखों का कोई मोल नहीं है, क्योंकि देखने की असली सुंदरता तो केवल उनके मुखड़े में है। शायर 'अख़्तर' दुआ करता है कि यदि उसे नबी के क़दमों की धूल नसीब हो जाए, तो वह उसे अपनी आँखों का सूरमा बना लेगा और फिर कभी किसी और सूरमे को हाथ नहीं लगाएगा। उसे पूरा यक़ीन है कि जब क़ब्र में फ़रिश्ते उससे उसकी उम्मत के बारे में पूछेंगे, तो वह अपनी आँखों में बसी नबी की छवि (तसवीर-ए-यार) दिखाकर अपनी वफ़ादारी साबित कर देगा।

लिरिक्स के मुताबिक, फ़रिश्तों के यह पूछने पर कि "तुम किस की उम्मत हो", शायर उन्हें अपनी आँखों में क्या देखने को कहता है?

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