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जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैं Lyrics In हिन्दी

(जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैं, हर जगह लुत्फ़ मदीने का लिया करते हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैं

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 08 Apr, 2023 10:01 AM IST

बार देखा गया : 359

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

जो मदीने के तसव्वुर में जिया करते हैं
हर जगह लुत्फ़ मदीने का लिया करते हैं

'इश्क़-ए-सरवर में जो हस्ती को फ़ना करते हैं
भेद उल्फ़त के फ़क़त उन पे खुला करते हैं

माल-ओ-दौलत की दु'आ हम न, ख़ुदा ! करते हैं
हम तो मरने की मदीने में दु'आ करते हैं

आग दोज़ख़ की जला ही नहीं सकती उन को
'इश्क़ की आग में दिल जिन के जला करते हैं

दर्द-ओ-आलाम में तस्कीन उन्हें मिलती है
नाम उन का जो मुसीबत में लिया करते हैं

तू सलाम उन से दर-ए-पाक पे जा कर कहना
इल्तिजा तुझ से हम, ऐ बाद-ए-सबा ! करते हैं

क्यूँ फिरें शौक़ में हम माल के मारे मारे
हम तो सरकार के टुकड़ों पे पला करते हैं

चाँद-सूरज का मुक़द्दर भी तो देखो अक्सर
गुंबद-ए-ख़ज़रा के नज़्ज़ारे किया करते हैं

रश्क 'अत्तार को उन ज़र्रों पर आता है जो
उन के ना'लैन के तल्वों से लगा करते हैं

क़ाबिल-ए-रश्क हैं, 'अत्तार ! वो क़िस्मत वाले
दफ़्न जो मीठे मदीने में हुवा करते हैं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ मदीना मुनव्वरा की बेपनाह मोहब्बत, वहाँ मौत पाने की ख़्वाहिश और हुज़ूर ﷺ के इश्क़ में डूब जाने का एक रूहानी बयान है। इसमें दर्शाया गया है कि एक सच्चा आशिक़ दुनियावी धन-दौलत से बेनियाज़ होकर केवल आक़ा ﷺ के दर की ग़ुलामी और मदीने की पाक मिट्टी में दफ़्न होने की आरज़ू रखता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो लोग हर पल अपने दिल में मदीने का ख़याल (तसव्वुर) बसाए रखते हैं, उन्हें दुनिया के हर कोने में मदीने जैसा ही रूहानी सुकून हासिल होता है। शायर कहता है कि जो हुज़ूर ﷺ के इश्क़ में अपनी हस्ती को मिटा (फ़ना) देते हैं, उन्हीं पर मोहब्बत के सच्चे रहस्य खुलते हैं, और जिनके दिल इश्क़-ए-रसूल की आग में तपते हैं, उन्हें दोज़ख़ (नरक) की आग कभी छू भी नहीं सकती।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
तसव्वुरध्यान / कल्पना या ख़याल
फ़नानष्ट / मिटा देना या विलीन होना
उल्फ़त / फ़क़तमोहब्बत / सिर्फ़ या केवल
दोज़ख़नर्क / जहन्नम
दर्द-ओ-आलामदुःख और तकलीफ़ें
तस्कीनशांति / सुकून या तसल्ली
बाद-ए-सबासुबह की ठंडी और मंद हवा
गुंबद-ए-ख़ज़राहरा गुंबद (हुज़ूर ﷺ का रौज़ा मुबारक़)
ना'लैनहुज़ूर ﷺ के पवित्र जूतियाँ / चरण-पादुका
रश्कनाज़ / ईर्ष्या (यहाँ सकारात्मक अर्थ में: गर्व होना)

सारांश (Summary)

इस कलाम में बताया गया है कि नबी ﷺ के दर के टुकड़ों पर पलने वाले मंगतों को दुनिया की धन-दौलत के पीछे मारे-मारे फिरने की कोई ज़रूरत नहीं होती। जब भी कोई मुसीबत आती है, आक़ा ﷺ का नाम लेते ही दिल को असीम शांति मिल जाती है। शायर 'अत्तार' कहते हैं कि यहाँ तक कि चाँद-सूरज भी गुंबद-ए-ख़ज़रा के दर्शन के लिए तरसते हैं, और वे लोग बेहद भाग्यशाली हैं जिन्हें इस पवित्र नगरी मदीने की गोद में हमेशा के लिए सोने (दफ़्न होने) का मुक़द्दर नसीब होता है।

शायर के मुताबिक किस तरह के दिलों को जहन्नम (दोज़ख) की आग नहीं जला सकती, और उन्होंने माल-ओ-दौलत के बजाय क्या दुआ मांगी है?

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