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जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता Lyrics In हिन्दी

(जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता, खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 29 Mar, 2023 07:50 AM IST

बार देखा गया : 161

Time to read: 3 min read

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प्यारे आक़ा, सोहने आक़ा, मेरे आक़ा, प्यारे आक़ा

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

ना पैदा करता कोई चीज़ भी खल्लाके दो आलम
दुलारा आमीना बी बी का गर पैदा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

भटकते दरबदर की ठोकरे खाते जमाने में
मेरे सरकार ने हमको जो अपनाया नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

सदा रहता है उस के बखत का तारा बुलंदी पर
नबी का चाहने वाला कहीं रुसवा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

सरे महसर कहाँ पहचाने जाते हम अगर रब ने
शाहे दिन की गुलामी का शरफ़ बकशा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

भला खाली गया है कौन उनके दर से बतलाओ
नबी के दर पे किस का मदआ पूरा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

मेरी भी कब्र में जलवा नुमा होंगे मेरे आक़ा
मेरा दिल सोच कर यह बात रंजीदा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

जलील ओ खवार हो जाता गुनाहों की सबब वल्लाह
बरोज़े हशर मुझ पर लुत्फ गर उनका नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

ना होती इस कदर उन में दरखशानी  कभी अरशद
जो मेहर ओ माह  में सरकार का जलवा नहीं होता

जो दिल से सय्यदे अबरार का शैदा नहीं होता
खुदाए लम याज़िल का वो कभी प्यारा नहीं होता

प्यारे आक़ा, सोहने आक़ा, मेरे आक़ा, प्यारे आक़ा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के प्रति सच्ची आस्था, अनन्य प्रेम और उनकी गुलामी को अपनाने के सर्वोच्च महत्व पर आधारित है। इसमें यह बात स्पष्ट की गई है कि इस संसार और परलोक दोनों की वास्तविक सफलता केवल और केवल आक़ा ﷺ के माध्यम से ही संभव है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भद्र और नेक लोगों के सरदार (हुज़ूर ﷺ) का दीवाना नहीं होता, वह ईश्वर (अल्लाह) का प्रिय कभी नहीं बन सकता। शायर कहता है कि यदि माता आमिना के दुलारे (मुहम्मद ﷺ) संसार में अवतरित न होते, तो दोनों जहानों का रचयिता ईश्वर सृष्टि की किसी भी वस्तु, यहाँ तक कि सूर्य और चंद्रमा को भी कोई चमक या अस्तित्व प्रदान न करता।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
सय्यदे अबरारनेक और पवित्र लोगों के सरदार (हुज़ूर ﷺ)
शैदाप्रेमी / दीवाना या गहरा चाहने वाला
लम याज़िलजिसका कभी अंत न हो / सदैव रहने वाला ईश्वर
ख़ल्लाक़-ए-दो आलमदोनों जहानों को पैदा करने वाला (अल्लाह)
बख़्तभाग्य / नसीब या क़िस्मत
मदआमनोरथ / इच्छा या दिली इच्छा
जलवा नुमाप्रकट होना / दर्शन देना
बरोज़े हश्रप्रलय के दिन / कयामत के दिन
दरख़शानीआभा / भव्य चमक या रौशनी

सारांश (Summary)

इस सुंदर कलाम का मुख्य सार यह है कि नबी ﷺ का सच्चा सेवक कभी भी दोनों जहानों में अपमानित (रुसवा) नहीं होता और उनकी चौखट से कभी कोई ख़ाली हाथ नहीं लौटता। शायर 'अरशद' कयामत और कब्र के कठिन पड़ावों पर आक़ा ﷺ की शफ़ाअत (कृपा) के प्रति पूर्ण आश्वस्त हैं। उन्हें इस बात का परम संतोष है कि मृत्यु के बाद कब्र के एकांत और अंधकार में भी उनके प्यारे आक़ा दर्शन देने ज़रूर पधारेंगे, जिसके कारण उनका हृदय कभी दुखी नहीं होता।

शायर के मुताबिक अगर अल्लाह ने हमें नबी ﷺ की गुलामी का शर्फ़ न बख़्शा होता, तो कयामत (सरे महशर) के दिन हमारा क्या हाल होता?

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