मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : जो भी नबी के इश्क के सांचे में ढल गया
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 24 Sep, 2022 02:44 PM IST
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जो भी नबी के इश्क के सांचे में ढल गया,
उसका कसम खुदा की मुकद्दर बदल गया (x2)
मेरे रसूले पाक के कदमों को चूम कर,
पत्थर जमी पर मोम की सूरत पिघल गया (x2)
मुश्किल में पड़ गई है मेरी मुश्किलें सभी,
मुश्किल कुशा का नाम जो मुंह से निकल गया (x2)
मैंने तो सिर्फ मसलक अहमद रजा कहा,
सुनकर वहाबियत का जनाजा निकल गया (x2)
जन्नत में उसको देखकर हूं रे मचल गई,
चेहरे पर अपने खाके मदीना जो मल गया (x2)
सज्जाद की जबान से नाते रसूल को,
सुनकर नबी का चाहने वाला मचल गया (x2)
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यह रूहानी नात शरीफ़ हुज़ूर पाक ﷺ से सच्चे प्रेम (इश्क़-ए-रसूल) की बरकत, उनके पवित्र कदमों के मोजिज़ों (चमत्कारों) और अहले-बैत व औलिया की निस्बत (संबंध) की ताक़त का बहुत ही सुंदर और अक़ीदत भरा बयान है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो भी व्यक्ति पैगंबर ﷺ के प्रेम के सांचे में ढल जाता है, ईश्वर की सौगंध उसकी किस्मत हमेशा के लिए संवर जाती है। मेरे पाक रसूल ﷺ के कदमों का स्पर्श पाकर धरती का कठोर पत्थर भी मोम की तरह पिघल गया, और जब भक्त के मुख से संकटमोचक यानी 'मुश्किल कुशा' (हज़रत अली) का नाम निकलता है, तो उसकी सारी परेशानियाँ खुद ब खुद मुश्किल में पड़ जाती हैं।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| मुकद्दर | भाग्य / क़िस्मत |
| सूरत | तरह / रूप या शक्ल |
| मुश्किल कुशा | मुसीबतों को हल करने वाला (हज़रत अली का लक़ब) |
| मसलक-ए-अहमद रज़ा | आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान की दीक्षा / विचारधारा |
| हूँ रे (हूरें) | जन्नत की अप्सराएँ / पवित्र स्त्रियाँ |
| खाके मदीना (ख़ाक-ए-मदीना) | मदीना शरीफ़ की पवित्र मिट्टी / धूल |
कवि का कहना है कि नबी ﷺ का इश्क़ हर बिगड़ी को बनाने वाला है। जो भाग्यशाली मदीना शरीफ़ की पावन धूल को अपने चेहरे पर मल लेता है, उसे देखकर स्वर्ग (जन्नत) की हूरें भी मचल उठती हैं। इस कलाम में अक़ीदे की दृढ़ता के लिए 'मसलक-ए-आला हज़रत' की गूंज का ज़िक्र है, और अंत में नात-ख़्वान 'सज्जाद' की आवाज़ में नात सुनकर नबी ﷺ के दीवानों के झूम उठने की सुंदर बात कही गई है।
शायर के अनुसार, जब किसी इंसान के मुँह से 'मुश्किल कुशा' का नाम निकलता है, तो उसकी मुश्किलों पर क्या असर पड़ता है?