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जागो शबे बरात इबादत की रात है Lyrics In हिन्दी

(जागो शबे बरात इबादत की रात है, सज्दे में सर झुकाओ शफ़ाअत की रात है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : जागो शबे बरात इबादत की रात है

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: राव अली हसनैन

जोड़ा गया : 23 Feb, 2024 06:26 AM IST

बार देखा गया : 507

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

जागो शबे बरात, इबादत की रात है

अल्लाह के हबीब के प्यारे की रात है
बंदों के वास्ते ये करामत की रात है

अल्लाह अल्लाह, अल्लाह अल्लाह
अल्लाह अल्लाह, अल्लाह अल्लाह

जागो शबे बरात, इबादत की रात है
सज्दे में सर झुकाओ, शफ़ाअत की रात है

जागो शबे बरात, इबादत की रात है
जागो शबे बरात, इबादत की रात है

जागो..., जागो..., जागो..., जागो...

नूरी महफ़िल पे चादर तानी नूर की
नूर फैला हुआ आज की रात है

चाँदनी में हैं डूबे हुए दो जहान
कौन जलवा नुमा आज की रात है

खुदा को याद करो, खुदा को याद करो

सुन ले सदा मज़बूरों की, ऐ मालिक-ए-जहान
भर दे जो मांगते हैं मुरादों से जोलिया

रह जाए ना मायूस कोई आज सवालि
दामन किसी का जाए ना मौला मेरे खाली

ये रात क्या है आज ज़माने को बता दे
सदके में मुहम्मद के कोई जलवा दिखा दे
बंदों को तोफ़ा बख़्शा है बंदा नवाज़ ने

जागो शबे बरात, इबादत की रात है
जागो शबे बरात, इबादत की रात है

जागो..., जागो..., जागो..., जागो...

फ़र्श पर धूम है, अर्श पर धूम है
बदनसीबी है उसकी जो महरूम है
फिर मिलेगी शब ये किसको मालूम है
आम लुत्फे ख़ुदा आज की रात है

अल्लाह अल्लाह, अल्लाह अल्लाह
अल्लाह अल्लाह, अल्लाह अल्लाह

इस शब में जिसने मांगा वही उसको मिल गया
अल्लाह ने मुरादों से दामन को भर दिया

खाली ना कोई जाएगा इस शबे बरात में
रहमत-ए-ख़ुदा पाएगा इस शबे बरात में
ईमान ताज़ा होता है इस शबे बरात को
बख़्शी है मौला ने ताक़त इस रात को
बंदों पे अपने उसकी इनायत की रात है

जागो शबे बरात, इबादत की रात है
जागो शबे बरात, इबादत की रात है

जागो..., जागो..., जागो..., जागो...

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम शब-ए-बरात की महानता और उस रात की रूहानी अहमियत को दर्शाता है। इसमें मोमिनों को रात भर जागकर इबादत करने और अल्लाह की रहमतें समेटने की प्रेरणा दी गई है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

शायर कहता है कि शब-ए-बरात अल्लाह की तरफ से बंदों के लिए एक नायाब तोहफा है, जिसमें हर मजबूर की पुकार सुनी जाती है। यह रात गुनाहों की माफ़ी (बख़्शिश) और हुज़ूर ﷺ की शफ़ाअत पाने का बेहतरीन अवसर है, जहाँ कोई भी सवाली खाली हाथ नहीं लौटता।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
शबे बरातमुक्ति या नजात की रात
शफ़ाअतसिफ़ारिश (हुज़ूर ﷺ द्वारा)
करामतईश्वरीय चमत्कार या कृपा
महरूूमवंचित (जिसे लाभ न मिला हो)
बंदा नवाज़अपने बंदों पर मेहरबानी करने वाला (अल्लाह)
इनायतकृपा या दया
मुरादइच्छा या मन्नत

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि शब-ए-बरात इबादत और तौबा की रात है। यह रात ज़मीन से आसमान तक नूर और अल्लाह के लुत्फ़ (कृपा) से भरी होती है। शायर समझाता है कि वह इंसान बदनसीब है जो इस रात सोकर गुज़ार दे, क्योंकि यह पाक रात ईमान को ताज़गी देने और अपनी झोलियाँ खुशियों से भरने के लिए आती है।


सवाल: इस कलाम के अनुसार, वह कौन सा व्यक्ति है जिसे शायर ने 'बदनसीब' कहा है?

लिरिक्स के आखिर में शायर ने "ईमान" और "ताक़त" के हवाले से इस रात की क्या फ़ज़ीलत बयान की है, और बंदों पर ख़ुदा की किस तरह की इनायत का ज़िक्र किया है?

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