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हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं Lyrics In हिन्दी

(हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं, दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 30 Jul, 2023 10:48 AM IST

बार देखा गया : 291

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

मुझे अपनी रहमत से तू अपना कर ले,
सिवा सब से तेरे किनारा करूं मैं।

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

मैं क्यूँ गैर की ठोकरें खाने जाऊँ,
तेरे दर से अपना गुज़ारा करूं मैं।

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

ये एक जान क्या है अगर हों करोड़ों,
तेरे नाम पर सबको वारा करूं मैं।

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

तेरे दर के होते कहाँ जाऊँ प्यारे,
कहाँ अपना दामन पसारा करूं मैं।

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

सबा ही से नूरी सलाम अपना कह दे,
सिवा उसके क्या और चारा करूं मैं।

हबीबे खुदा का नज़ारा करूं मैं,
दिल-ओ-जान उन पर निसारा करूं मैं।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह अत्यंत भावपूर्ण और प्रसिद्ध नात-ए-पाक (मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद, हज़रत मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान 'नूरी' द्वारा रचित) पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के प्रति एक सच्चे आशिक़ की अगाध श्रद्धा, उनके दर से गहरी निष्ठा और अपनी जान न्योछावर करने के जज़्बे को दर्शाती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मेरी बस यही अंतिम इच्छा है कि मैं जीवन भर अल्लाह के प्यारे महबूब, यानी मेरे नबी ﷺ का दीदार (नज़ारा) करता रहूँ और अपना दिल व जान उन पर कुर्बान कर दूँ। शायर ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसे अपनी विशेष कृपा से अपना बना ले, ताकि वह दुनिया के सभी झूठे रिश्तों और सहारों को छोड़कर केवल ईश्वर और उसके रसूल ﷺ का होकर रह जाए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
हबीबे खुदाअल्लाह के प्यारे दोस्त/महबूब (नबी ﷺ)
निसारा / वाराकुर्बान करना / न्योछावर करना
किनारा करनाअलग हो जाना / छोड़ देना
ग़ैरपराए / अन्य लोग
पसारा करनाफैलाना (जैसे मदद के लिए झोली या दामन फैलाना)
सबासुबह की ठंडी और धीमी हवा
चाराउपाय / रास्ता या विकल्प

सारांश (Summary)

इस नात का मुख्य सार यह है कि एक सच्चे भक्त के लिए पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ की चौखट ही सर्वोपरि है; वह दूसरों के द्वारों पर ठोकरें खाने के बजाय केवल नबी ﷺ के दर का सवाली बनकर जीना चाहता है। शायर कहता है कि यदि उसके पास एक के बजाय करोड़ों जीवन भी हों, तो वह उन सबको नबी ﷺ के पावन नाम पर सहर्ष न्योछावर कर देगा। अंत में शायर 'नूरी' सुबह की हवा (सबा) के माध्यम से नबी ﷺ की बारगाह में अपना व्याकुल सलाम भेजता है, क्योंकि उसकी विरह-वेदना का इसके सिवा कोई और उपाय (चारा) नहीं है।

लिरिक्स के मुताबिक, अगर शायर के पास एक के बजाय करोड़ों जानें हों, तो वह उनका क्या करेगा?

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