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ग़म हो गये बेशुमार आका Lyrics In हिन्दी

(ग़म हो गये बेशुमार आका, बंदा तेरे निसार आका)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : ग़म हो गये बेशुमार आका

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 08 Dec, 2025 02:22 PM IST

बार देखा गया : 123

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

ग़म हो गये बेशुमार आका,
बंदा तेरे निसार आका

बिगड़ा जाता है खेल मेरा,
आका आका सवार आका

मंज्धार पे आके नाव टूटी,
दे हाथ की हूँ मैं पार आका

टूटी जाती है पीठ मेरी,
लिल्लाह ये बोझ उतार आका

हल्का है अगर हमारा पल्ला,
भारी है तेरा वक़ार आका

मजबूर हैं हम तो फ़िक्र क्या है,
तुमको तो है इख़्तियार आका

मैं दूर हूँ तुम तो हो मेरे पास,
सुन लो मेरी पुकार आका

मुझसा कोई ग़मज़दा ना होगा,
तुमसा नहीं ग़मगुसार आका

गर्दाब में पड़ गई है कश्ती,
डूबा डूबा, उतार आका

तुम वो कि करम को नाज़ तुम से,
मैं वो कि बदी को आर आका

फिर मुँह न पड़े कभी ख़िज़ाँ का,
दे दे ऐसी बहार आका

जिसकी मर्ज़ी ख़ुदा न टाले,
मेरा है वो नामदार आका

है मुल्के ख़ुदा पे जिसका क़ब्ज़ा,
मेरा है वो कामगार आका

सोया किये नाबकार बंदे,
रोया किये ज़ार ज़ार आका

क्या भूल है उनके होते कहलायें,
दुनिया के ये ताजदार आका

उनके अदना ग़दा पे मिट जायें,
ऐसे ऐसे हज़ार आका

बे-अब्र-ए करम के मेरे धब्बे,
ला तग़्सिलुहल-बिहार आका

इतनी रहमत रज़ा पे कर लो,
ला यक़रुबुहुल बवॉर आका

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान द्वारा लिखित एक अत्यंत भावुक इस्तिग़ासा (फरियाद) है। इसमें एक बेबस भक्त अपने दुखों और पापों के बोझ से मुक्ति पाने के लिए हुज़ूर ﷺ की शरण में गुहार लगा रहा है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मेरी जीवन-रूपी नैया मझधार में फँस गई है और दुखों ने मुझे घेर लिया है। वह हुज़ूर ﷺ से प्रार्थना करता है कि "हे आका! मैं मजबूर हूँ पर आप सामर्थ्यवान (इख़्तियार वाले) हैं, अपने करम का हाथ बढ़ाकर मेरी बिगड़ती किस्मत को संवार दीजिए।"


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
निसारन्योछावर या समर्पित
सवारसंवारना या ठीक करना
वक़ारसम्मान या गरिमा
इख़्तियारअधिकार या शक्ति
ग़मगुसारदुख बाँटने वाला / हमदर्द
गर्दाबभँवर (Whirlpool)
बदीबुराई या पाप
नाबकारनिकम्मा या अपराधी

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि संसार के सभी राजा और धनवान नबी ﷺ के एक साधारण भिखारी (ग़दा) के सामने कुछ भी नहीं हैं। कवि अपनी लाचारी का वर्णन करते हुए कहता है कि हुज़ूर ﷺ वह हस्ती हैं जिनकी इच्छा को स्वयं ईश्वर भी नहीं टालता, इसलिए वही उसके जीवन की डूबती कश्ती को किनारा लगा सकते हैं।

नात के मक़्ता (आखिरी हिस्से) में शायर "रज़ा" ने अपने गुनाहों के धब्बे धोने के लिए किस चीज़ की तलब की है, और उनकी आखिरी इल्तेजा क्या है?

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