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Dil Mein Jamale Gumbad E Khazra Basa Ke Dekh Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : Dil Mein Jamale Gumbad E Khazra Basa Ke Dekh

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 24 Sep, 2022 02:54 PM IST

बार देखा गया : 2.4K बार डाउनलोड हुआ : 179

Time to read: 1 min read

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Dil Mein Jamale Gumbad E Khazra Basake Dekh,
Unki Bulandiyon Ko Bhi Nazre Jhuka Ke Dekh (x2)

Sidra Pe Bhi Ujale Hain Gare Hira Ke Dekh,
Pahunche Qadam Kahan Se Kahan Mustafa Ke Dekh (x2)

Pad Jayegi Kaleje Mein Thandak Abhi Abhi,
Ishqe Nabi Ki Aag Toh Dil Mein Laga Ke Dekh (x2)

Ishqe Rasool Khud Uda Le Jayega Tujhe,
Tute Huye Hi Bazu Zara Fadfada Ke Dekh (x2)

Pehchan Jab Na Sunni Wahabhi Ki Ho Tujhe,
Ahmad Raza Ke Naam Ka Nara Laga Ke Dekh (x2)

Aa Jayega Nazar Tujhe Allah Ka Jamal,
Chal Najdiya Bareilly Ka Surma Laga Ke Dekh (x2)
 
Qismat Badal Na Jaye To Main Zimmedar Hun,
Sarkar Ke Gulamon Ki Saf Mein To Aa Ke Dekh (x2)

Pahunche Qadam Kahan Se Kahan Mustafa Ke Dekh,
Unki Bulandiyon Ko Bhi Nazre Jhuka Ke Dekh 

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम हुज़ूर पाक ﷺ की महानता, ईश्वर के प्रति उनके प्रेम (इश्क़-ए-रसूल) की असीम शक्ति और आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान की दीक्षा (मसलक) की महत्ता को बेहद जोश और अक़ीदत के साथ बयां करता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि अपने हृदय में गुम्बद-ए-ख़ज़रा (हुज़ूर ﷺ के रौज़े) की सुंदर छवि बसा कर देखो, उनकी महानता का स्तर इतना ऊँचा है कि वहाँ आँखें झुका कर ही उनकी शान को समझा जा सकता है। कवि कहता है कि आसमानों की आख़िरी सीमा (सिदरा) पर भी गुफ़ा-ए-हिरा (गारे-हीरा) का ही नूर चमक रहा है, जो यह दिखाता है कि मुस्तफ़ा ﷺ के पावन कदम कहाँ से कहाँ पहुँच गए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
जमालसौंदर्य / अलौकिक सुंदरता
गुम्बद-ए-ख़ज़राहरा गुम्बद (मदीना शरीफ़ में हुज़ूर ﷺ का रौज़ा)
सिदरासिदरा-तुल-मुन्तहा (सातवें आसमान पर स्थित एक पवित्र बेरी का पेड़/सीमा)
गारे-हीराहीरा नाम की गुफ़ा (जहाँ हुज़ूर ﷺ पर पहली वह्य/प्रकाशना उतरी थी)
बाज़ूपंख / पर
शफ़ (सफ़)पंक्ति / कतार

सारांश (Summary)

कवि का कहना है कि यदि दिल को वास्तविक सुकून और ठंडक चाहिए, तो उसमें पैगंबर ﷺ के प्रेम की अग्नि जलानी होगी; यह प्रेम इतना शक्तिशाली है कि टूटे पंखों वाले (कमज़ोर) इंसान को भी बुलंदियों तक उड़ा ले जाता है। सही आस्था की पहचान के लिए कवि आला हज़रत का नाम लेने और 'बरेली का सुरमा' (वहाँ की शिक्षाओं) को अपनाने की सलाह देता है। अंत में वह पूर्ण विश्वास के साथ दावा करता है कि जो भी सच्चे मन से हुज़ूर ﷺ के सेवकों की पंक्ति में शामिल हो जाता है, उसकी किस्मत का बदलना निश्चित है।

शायर के अनुसार, यदि अपनी क़िस्मत को बदलना है तो इंसान को कहाँ और किस की सफ़ (पंक्ति) में आकर खड़ा होना पड़ेगा?

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