मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : दिखा दे या इलाही मुझको रुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : असद इक़बाल कलकत्तावी
नातख्वान/कलाकार: असद इक़बाल कलकत्तावी
जोड़ा गया : 09 Jan, 2023 12:43 PM IST
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दिखा दे या इलाही मुझको रुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
दिखा दे या इलाही मुझको रुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
नज़र को आज तक है जूसतजुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
नज़र को आज तक है जूसतजुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
जो पूछा हज़रते दिल से कहाँ जाते हो बतलाओ,
जो पूछा हज़रते दिल से कहाँ जाते हो बतलाओ,
दिल साहब ने फरमाया सुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
दिल साहब ने फरमाया सुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मैं अपनी ज़िंदगी के वास्ते मेराज समझूँगा,
मैं अपनी ज़िंदगी के वास्ते मेराज समझूँगा,
मिले किस्मत से जो आबे वज़ू ऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
मिले किस्मत से जो आबे वज़ू ऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
हो जिसके दिल में शम ऐ मसलके अहमद रज़ा रोशन,
हो जिसके दिल में शम ऐ मसलके अहमद रज़ा रोशन,
वही महसूस कर पाएंगे बुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
वही महसूस कर पाएंगे बुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
वो जिनके नाम सुनते ही मुनाफिक कांप जाते हैं,
वो जिनके नाम सुनते ही मुनाफिक कांप जाते हैं,
है किसमे दम के ठहरे रूबरूऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
है किसमे दम के ठहरे रूबरूऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
असद चलिए करे मिलकर नज़ारा आज जन्नत का,
असद चलिए करे मिलकर नज़ारा आज जन्नत का,
बना है अरज़े जन्नत कुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म,
बना है अरज़े जन्नत कुऐ मुफ़्ती ऐ आज़म
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद, मुफ़्ती ऐ आज़म ज़िन्दाबाद
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यह मनकबत मुफ्ती-ए-आजम हिंद (हजरत मुस्तफा रजा खान) की शान, उनसे अकीदत और उनके दरबार की अजमत का बयान है, जिसमें उनके रुख की जियारत और उनके नक्शे-कदम पर चलने की ख्वाहिश का इजहार किया गया है।
इस कलाम का मतलब है कि शायर का दिल और नजर सिर्फ मुफ्ती-ए-आजम के चेहरे के दीदार और उनकी गली की तरफ जाने के लिए बेचैन हैं। उनके वजू का पानी मिलना जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी (मेराज) है, और जो लोग आला हजरत अहमद रजा के रास्ते पर चलते हैं, वही उनकी रूहानियत को महसूस कर सकते हैं।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| रुऐ (Ruye) | चेहरा (Face) |
| जुस्तजू (Justuju) | तलाश या चाहत (Search/Desire) |
| सुऐ (Suye) | की तरफ (Towards) |
| मेराज (Meraj) | बुलंद मुकाम/सर्वोच्च स्थान (Highest Peak) |
| आबे वज़ू (Aabe Wazoo) | वजू का पानी (Ablution Water) |
| बुऐ (Buye) | खुशबू (Fragrance) |
| मुनाफिक (Munafik) | ढोंगी या कपटी (Hypocrite) |
| रूबरूऐ (Rubaruye) | आमने-सामने (In Front of) |
| अरज़े (Arze) | जमीन (Land) |
| कुऐ (Kuye) | गली (Street/Lane) |
शायर 'असद' अपने दिल की दीवानगी का जिक्र करते हुए कहते हैं कि उनकी हर धड़कन और नजर मुफ्ती-ए-आजम की दीवानी है। उनका रास्ता हक का रास्ता है जिससे दीन के दुश्मन कांपते हैं, और उनकी गली का नजारा किसी जन्नत के नजारे से कम नहीं है क्योंकि उनकी चौखट आज जन्नत की जमीन बन चुकी है।
शायर के मुताबिक किस तरह के लोग मुफ्ती-ए-आजम की रूहानियत (खुशबू) को महसूस कर सकते हैं, और उनकी गली (कूए) को किसके बराबर बताया गया है?