मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Dene Ki Der Hai Na Dilane Ki Der Hai
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 17 Nov, 2022 01:19 PM IST
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Dene Ki Der Hai Na Dilane Ki Der Hai,
Khwaja Piya Ko Honth Hilane Ki Der Hai
Tham Jayegi Abhi Abhi Gardish Ki Aandhiyan,
Khwaja Piya Ka Nara Lgane Ki Der Hai
Jo Chaho Aye Farishto Wahi Mujhse Puchna,
Khwaja Piya Huzoor Ke Aane Ki Der Hai
Dono Jahan Ki Daulate Mil Jaayengi Abhi,
Chaukhat Pe Unki Jholi Bhichane Ki Der Hai
Saitan Ki Kya Majal Hai Jo Ghar Mein Aasake,
Khwaja Ka Naam Ghar Mein Likhane Ki Der Hai
Jalse Mein Aaj Aayenge Sajjad Dekhna,
Khwaja Piya Ko Dil Se Bulane Ki Der Hai
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यह मनक़बत सुल्तान-उल-हिन्द हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (रहमतुल्लाह अलैह) की शान, उनकी विलायत और उनके दरबार की अज़मत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनके एक इशारे से बड़ी से बड़ी मुसीबत टल जाती है।
इस कलाम का मतलब है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के दरबार से कुछ भी मिलना नामुमकिन नहीं है, बस उनके दुआ के लिए होंठ हिलाने की देर है। उनकी चौखट पर झोली फैलाते ही दोनों जहान की दौलत मिल जाती है, और उनके नाम की बरकत से घर में शैतान के दाख़िल होने की मजाल नहीं रहती।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| गर्दिश (Gardish) | बुरा वक़्त या विपत्ति के चक्र (Bad times/Misfortune) |
| नारा (Nara) | पुकार या जयघोष (Slogan/Shout) |
| हज़ूर (Huzoor) | महोदय या सम्मानजनक शब्द (Honorable presence) |
| चौखट (Chaukhat) | दहलीज़ या द्वार (Doorstep) |
| मजाल (Majal) | हिम्मत या हैसियत (Audacity/Daring) |
| जलसे (Jalse) | धार्मिक सभा या महफ़िल (Gathering) |
शायर 'सज्जाद' इस मनक़बत में फ़रमाते हैं कि ख़्वाजा पिया का नाम और उनकी निस्बत हर मुसीबत का हल है। यहाँ तक कि क़ब्र में भी फ़रिश्तों के सवालों के वक़्त ख़्वाजा पिया की मौजूदगी सब आसान कर देगी। बस शर्त यह है कि उन्हें सच्चे दिल से पुकारा जाए और उनकी चौखट पर अक़ीदत (श्रद्धा) के साथ झोली बिछाई जाए।
शायर के मुताबिक घर में शैतान की मजाल कब खत्म हो जाती है, और कब्र में फरिश्तों के सवालों के वक्त शायर को किसका इंतजार है?