मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
- 1 दिन पहले fiber_manual_record 59 बार देखा गया
टाइटल : देने की देर है ना दिलाने की देर है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 17 Nov, 2022 01:19 PM IST
बार देखा गया : 2K
Time to read: 1 min read
देने की देर है ना दिलाने की देर है,
ख्वाजा पिया को होंठ हिलाने की देर है।
थम जाएगी अभी अभी गर्दिश की आंधियां,
ख्वाजा पिया का नारा लगाने की देर है।
जो चाहो आए फ़रिश्तो वही मुझसे पूछना,
ख्वाजा पिया हज़ूर के आने की देर है।
दोनों जहान की दौलतें मिल जाएंगी अभी,
चौखट पे उनकी झोली बिछाने की देर है।
शैतान की क्या मजाल है जो घर में आ सके,
ख्वाजा का नाम घर में लिखाने की देर है।
जलसे में आज आएंगे सज्जाद देखना,
ख्वाजा पिया को दिल से बुलाने की देर है।
This summary is AI-generated • Reviewed for quality.
यह मनक़बत सुल्तान-उल-हिन्द हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ (रहमतुल्लाह अलैह) की शान, उनकी विलायत और उनके दरबार की अज़मत का बयान है, जिसमें बताया गया है कि उनके एक इशारे से बड़ी से बड़ी मुसीबत टल जाती है।
इस कलाम का मतलब है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के दरबार से कुछ भी मिलना नामुमकिन नहीं है, बस उनके दुआ के लिए होंठ हिलाने की देर है। उनकी चौखट पर झोली फैलाते ही दोनों जहान की दौलत मिल जाती है, और उनके नाम की बरकत से घर में शैतान के दाख़िल होने की मजाल नहीं रहती।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| गर्दिश (Gardish) | बुरा वक़्त या विपत्ति के चक्र (Bad times/Misfortune) |
| नारा (Nara) | पुकार या जयघोष (Slogan/Shout) |
| हज़ूर (Huzoor) | महोदय या सम्मानजनक शब्द (Honorable presence) |
| चौखट (Chaukhat) | दहलीज़ या द्वार (Doorstep) |
| मजाल (Majal) | हिम्मत या हैसियत (Audacity/Daring) |
| जलसे (Jalse) | धार्मिक सभा या महफ़िल (Gathering) |
शायर 'सज्जाद' इस मनक़बत में फ़रमाते हैं कि ख़्वाजा पिया का नाम और उनकी निस्बत हर मुसीबत का हल है। यहाँ तक कि क़ब्र में भी फ़रिश्तों के सवालों के वक़्त ख़्वाजा पिया की मौजूदगी सब आसान कर देगी। बस शर्त यह है कि उन्हें सच्चे दिल से पुकारा जाए और उनकी चौखट पर अक़ीदत (श्रद्धा) के साथ झोली बिछाई जाए।
शायर के मुताबिक घर में शैतान की मजाल कब खत्म हो जाती है, और कब्र में फरिश्तों के सवालों के वक्त शायर को किसका इंतजार है?