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Chod Kar Ab Tera Astana Karbala Ja Raha Hoon Main Nana Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : Chod Kar Ab Tera Astana Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : शमीम रज़ा फ़ैज़ी

नातख्वान/कलाकार: शमीम रज़ा फ़ैज़ी

जोड़ा गया : 12 Oct, 2022 08:22 AM IST

बार देखा गया : 8.1K बार डाउनलोड हुआ : 284

Time to read: 1 min read

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Chod Kar Ab Tera Aastana,
Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

Raahe Haq Mein Hai Gardan Katana,
Karbala Jaa Raha Hoon Main Nana

Sar Hatheli Per Le Kar Chale Hain,
Bhooke Pyase Bahattar (72) Chale Hain,
Hashr Mein Aab E Kausar Pilana,
Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

Ek Aisa Main Sajda Karunga,
Hashr Tak Jis Ko Pura Karunga,
Sar Qayamat Ke Din Hai Uthana,
Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

Har Yezidi Ko Aaye Pasina,
Jab Dikhaya Hai Asgar Ne Seena,
Hil Gaya Hai Yazidi Gharana,
Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

Keh Raha Hai Yeh Poora Gharana,
Karbala Ja Raha Hoon Main Nana

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) द्वारा मदीना मुनव्वरा छोड़ते समय अपने नाना हुज़ूर पाक ﷺ के रौज़े पर अंतिम विदाई देने और सत्य (हक़) की रक्षा के लिए कर्बला के मैदान में दी जाने वाली महान क़ुर्बानी का एक अत्यंत भावुक और श्रद्धापूर्ण वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि इमाम हुसैन (र.अ.) अपने नाना से विदा लेकर कर्बला की ओर जा रहे हैं, जहाँ उन्हें सत्य की राह में अपनी गर्दन कटानी है। वे अपने साथ ७२ भूखे-प्यासे जाँबाज़ों को लेकर निकले हैं और अपने नाना से वादा करते हैं कि वे कर्बला की तपती रेत पर एक ऐसा ऐतिहासिक सजदा करेंगे जो प्रलय (क़यामत) तक याद रखा जाएगा।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Hindi)
आसतानाचौखट / पवित्र दरब़ार या रौज़ा
राहे हक़सत्य और धर्म का मार्ग
हशरप्रलय का दिन / क़यामत (न्याय का दिन)
आबे कौसरजन्नत की पवित्र नदी 'कौसर' का जल
सजदाईश्वर के सामने सिर झुकाना / इबादत
असग़रहज़रत अली असग़र (इमाम हुसैन के ६ महीने के मासूम पुत्र)

सारांश (Summary)

इमाम हुसैन (र.अ.) अपने नाना के इस्लाम धर्म को बचाने के लिए अपने ७२ साथियों के साथ अपनी जान हथेली पर रखकर कर्बला के युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। इस सफर में उनका पूरा परिवार उनके साथ है। कवि कहता है कि जब ६ महीने के नन्हे अली असग़र ने भी ज़ालिमों के तीर के सामने अपना मासूम सीना तान दिया, तो अत्याचारी यज़ीद का पूरा साम्राज्य और उसका घराना भय से काँप उठा।

शायर के अनुसार, हज़रत इमाम हुसैन (र.अ.) मैदान-ए-कर्बला में खुदा के हुज़ूर कैसा 'सजदा' करने का वादा अपने नाना से कर रहे हैं?

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