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चाँद अजमेर में कितना रौशन हुआ Lyrics In हिन्दी

(चाँद अजमेर में कितना रौशन हुआ, ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : चाँद अजमेर में कितना रौशन हुआ

श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 03 Jan, 2024 09:24 AM IST

बार देखा गया : 254

Time to read: 2 min read

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ख़्वाजा! ख़्वाजा! ख़्वाजा! ख़्वाजा!

किश्त-ए-दीदा-ओ-जाँ लहलहाने लगी
मेरे दिल की ज़मीं मुस्कुराने लगी
इश्क़-ए-ख़्वाजा के पौधे शजर बन गए
धरती अजमेर की जगमगाने लगी

ख़्वाजा पिया! ख़्वाजा पिया!
ख़्वाजा पिया! ख़्वाजा!

चाँद अजमेर में कितना रौशन हुआ
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
कुफ़्र-ओ-ज़ुल्मत का बादल ख़ुद ही छट गया
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

चिश्तियों के घरों में ख़ुशी आ गई
ऐसा लगने लगा ज़िंदगी आ गई
चेहरा चेहरा खिला, दिल भी कहने लगा
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

आए दरबार में ले के कश्कोल हम
कर दो, कर दो करम, रख लो सब का भरम
तेरे दर से न मायूस कोई गया
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

हर जगह तेरी इज़्ज़त का शोहरा हुआ
लाडला तू नबी का, हसन संजरी!
इब्न-ए-ज़हरा है तू, हसनी शजरा तेरा
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

आज अजमेर क्या! सारी दुनिया में ही
ख़्वाजा-ए-चिश्त की महफ़िलें सज गईं
है उजागर समाँ, ख़ूब लंगर हुआ
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ की छटी आ गई

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मनक़बत हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (रह.) की शान और उनके उर्स (छठी शरीफ़) की बरकतों का एक ख़ूबसूरत वर्णन है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के प्रेम से भक्त के मन की बंजर ज़मीन हरी-भरी हो गई है और उनके उर्स (छठी) की आमद से अंधेरा छट गया है। शायर कहता है कि अजमेर का ज़र्रा-ज़र्रा उनके नूर से जगमगा रहा है और भक्त उनके दर पर अपनी झोली (कश्कोल) फैलाकर करम की भीख माँग रहे हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
किश्त-ए-दीदा-ओ-जाँआँखों और प्राणों की खेती
शजरपेड़ या वृक्ष
ज़ुल्मतअंधकार या अंधेरा
कश्कोलभिक्षा पात्र या प्याला
इब्न-ए-ज़हराहज़रत फ़ातिमा (ज़हरा) के सुपुत्र
शजरावंशावली (Family Tree)
उजागरप्रकाशित या साफ़
शोहराप्रसिद्धि या चर्चा

सारांश (Summary)

इस कलाम का सार यह है कि ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (रह.) का दरबार वह स्थान है जहाँ से कोई भी निराश नहीं लौटता। उनकी 'छठी शरीफ़' का अवसर चिश्ती सिलसिले के मानने वालों के लिए नई ज़िंदगी और रूहानी ख़ुशी लेकर आता है। उन्हें "हसन संजरी" और नबी ﷺ का लाडला कहकर उनकी उच्च वंशावली और अजमेर में उनकी आध्यात्मिक सत्ता को सलाम पेश किया गया है।

ख्वाजा-ए-ख्वाजगान की "छठी" आने पर अजमेर और चिश्तियों के घरों का माहौल कैसा हो जाता है?

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