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चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले Lyrics In हिन्दी

(चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले, मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 08 Apr, 2023 09:27 AM IST

बार देखा गया : 532

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले
मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

बरसता नहीं देख कर अब्र-ए-रहमत
बदों पर भी बरसा दे बरसाने वाले

मैं मुजरिम हूँ आका मुझे साथ ले लो
कि रास्ते में हैं जा-ब-जा थाने वाले

हरम की ज़मीं और क़दम रख के चलना
अरे सर का मौक़ा है, ओ जाने वाले

मदीने के ख़ित्ते, ख़ुदा तुझको रखे
ग़रीबों फ़क़ीरों के ठहराने वाले

तु ज़िंदा है वल्लाह, तु ज़िंदा है वल्लाह
मेरी चश्म-ए-आलम से छुप जाने वाले

तेरा खाए, तेरे ग़ुलामों से उलझे
हैं मुनकिर अजब ख़ाने ग़ुर्राने वाले

चल उठ ज़बाह फ़रसा हो साक़ी के दर पर
दर-ए-जूद है मेरे मस्ताने वाले

रहेगा यूँ ही उनका चर्चा रहेगा
पड़े ख़ाक हो जाए जल जाने वाले

अब आई शफ़ाअत की साअत अब आई
ज़रा चैन ले मेरे घबराने वाले

रज़ा, नफ़्स दुश्मन है दम में ना आना
कहा तुमने देखे हैं चंद राने वाले

चमक तुझसे पाते हैं सब पाने वाले
मेरा दिल भी चमका दे चमकाने वाले

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह सुप्रसिद्ध नात शरीफ़ इमाम-ए-अहले-सुन्नत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी द्वारा रचित है। इसमें नबी-ए-करीम ﷺ की नूरानियत, उनके जीवित होने (हयात-उल-नबी), उनकी शफ़ाअत (क्षमा की सिफ़ारिश) और उनके दर की अज़मत को पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि इस संसार में जिसे भी ज्ञान, अध्यात्म और ईमान की चमक मिली है, वह सब हुज़ूर ﷺ के नूर से ही मिली है। शायर प्रार्थना करता है कि हे आक़ा! मैं गुनहगार ज़रूर हूँ, लेकिन आपकी रहमत का बादल (अब्र-ए-रहमत) अच्छे-बुरे का भेद किए बिना सब पर बरसता है, इसलिए मेरे काले दिल को भी अपने नूर से रोशन कर दीजिए और मुझे अपने साथ ले लीजिए क्योंकि परलोक के मार्ग में कर्मों की जवाबदेही के कई थाने (पड़ाव) हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
बदोंबुरों / गुनहगारों
अब्र-ए-रहमतदया का बादल / रहमत का बादल
जा-ब-जाजगह-जगह / हर मोड़ पर
ख़ित्तेक्षेत्र / पावन धरती (मदीना)
चश्म-ए-आलमदुनिया की आँख / सांसारिक दृष्टि
मुनकिरइनकार करने वाला / विरोधी
दर-ए-जूदउदारता/दानशीलता का दरवाज़ा
साअतघड़ी / समय या पल
शफ़ाअतमोक्ष/क्षमा के लिए सिफ़ारिश
नफ़्सआंतरिक बुराई / वासना या अहंकार

सारांश (Summary)

इस कलाम का मुख्य सार यह है कि हुज़ूर ﷺ अपनी क़ब्र-ए-अन्वर में हक़ीक़त में जीवित (ज़िंदा) हैं, भले ही वे दुनिया की आँखों से ओझल हों। आला हज़रत कहते हैं कि विरोध करने वाले चाहे जलकर ख़ाक हो जाएँ, नबी ﷺ का ज़िक्र और चर्चा कयामत तक यूँ ही बुलंद रहेगा। जब कयामत के दिन पापी और गुनहगार अपनी भूलों के कारण घबरा रहे होंगे, तब आक़ा ﷺ की शफ़ाअत (सिफ़ारिश) की घड़ी आएगी जो हर तड़पते हुए मोमिन को चैन और मुक्ति दिलाएगी।

शायर ने 'जा बजा थाने वाले' शब्द से किस तरफ़ इशारा किया है, और उन्होंने नबी ﷺ के ज़िंदा होने पर क्या गवाही दी है?

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