नबी को बुलाना फ़लक से भी ऊपर
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टाइटल : बाग़-ए-जन्नत में निराली चमन आ रही है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 07 Aug, 2023 08:49 AM IST
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बाग़-ए-जन्नत में निराली चमन आ रही है,
क्या मदीने पे फ़िदा होकर बहार आई है।
उनके गेसू नहीं, रहमत की घटा छाई है,
उनके आब्रू नहीं, दो क़िब्लों की यकजाई है।
सरेवाला उन्हें रहमत की घटा लाई है,
हाल बिगड़ा है तो बीमार की बन आई है।
जिसके हाथों के बनाए हुए हैं हुस्न-ओ-जमाल,
ऐ हसीन! तेरी अदाएँ उसको पसंद आई हैं।
तेरे जल्वों में ये आलम है कि चश्म-ए-आलम,
ताब-ए-दीदार नहीं, फिर भी तमाशाई है।
जब तेरी याद में दुनिया से गया है कोई,
जान लेने को दुल्हन बन के क़ज़ा आई है।
दर्द-ए-दिल किसको सुनाऊँ मैं तुम्हारे होते,
बेकसों की इसी सरकार में सुनवाई है।
चश्म-ए-बेख़्वाब के सदके में है बेदार नसीब,
आप जागो तो हमें चैन की नींद आई है।
ना-उम्मीदो! तुम्हें मुज़्दा कि ख़ुदा रहमत,
उन्हें महशर में तुम्हारे ही लिए लाई है।
ऐ हसन! हुस्न-ए-जहान-ताब के सदके जाऊँ,
ज़र्रे-ज़र्रे से आया जल्वा-ए-ज़ेबाई है।
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यह नात-ए-पाक हुज़ूर ﷺ के अलौकिक सौंदर्य (हुस्न-ओ-जमाल) और उनके दयालु स्वभाव का बहुत ही सुंदर वर्णन करती है। इसमें बताया गया है कि नबी-ए-करीम ﷺ की याद और उनका आसरा दुनिया और आख़िरत दोनों ही जगह मोमिनों के लिए सबसे बड़ी राहत है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि मदीने की पवित्र धरती पर जन्नत की निराली बहार फिदा हो रही है, और हुज़ूर ﷺ के काले गेसू (बाल) वास्तव में कायनात पर छाई रहमत की घटाएं हैं। शायर कहता है कि जब इस दुनिया में हमारे दुखों को सुनने के लिए हुज़ूर ﷺ का पावन दर मौजूद है, तो हमें किसी और के सामने अपना दर्द-ए-दिल बयां करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
| शब्द (Word) | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| चमन आराही | बाग़ की सुंदरता / हरियाली |
| यकजाई | एक जगह इकट्ठा होना / मिलना |
| चश्म-ए-आलम | दुनिया की आँखें |
| ताब-ए-दीदार | दीदार (देखने) की शक्ति या हिम्मत |
| क़ज़ा | मृत्यु / मौत |
| चश्म-ए-बेख़्वाब | बिना सोई हुई आँखें (हुज़ूर ﷺ की जागती आँखें) |
| मुज़्दा | शुभ समाचार / खुशखबरी |
| जल्वा-ए-ज़ेबाई | अत्यंत सुंदर और आकर्षक रूप |
इस कलाम में निराश और गुनहगार लोगों को खुशखबरी दी गई है कि ईश्वर ने कयामत (महशर) के दिन हुज़ूर ﷺ को हमारी ही शफ़ाअत (सिफारिश) के लिए भेजा है। शायर 'हसन' (हसन रज़ा खान) कहते हैं कि नबी की याद में प्राण त्यागना इतना सुखद है कि मौत (क़ज़ा) भी एक सुंदर दुल्हन का रूप धरकर आती है, और उनके इसी नूरानी स्वरूप की चमक ब्रह्मांड के ज़र्रे-ज़र्रे में फैली हुई है।
शायर के मुताबिक जब कोई हुज़ूर ﷺ की याद में इस दुनिया से जाता है, तो मौत (क़ज़ा) उसके पास किस रूप में आती है?