मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : Bada Pyaara Hai Nana Hussain Ka
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : अली हैदर फ़ैज़ी लखनपुरी
नातख्वान/कलाकार: अली हैदर फ़ैज़ी लखनपुरी
जोड़ा गया : 22 Mar, 2023 06:59 AM IST
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jinki Shaan Nirali Jinki Zulfe Kali Kali,
Bada Pyaara Hai Nana Hussain Ka,
Koi Kisi Ka Deewana, Koi Kisi Ka Deewana,
Mujhe Bhata Hai Nana Hussain Ka,
Mujhe Bhata Hai Nana Hussain Ka
bada Pyaara Hai Nana Hussain Ka
is Deen Ki Khatir Kya Na Kiya,
Woh Jaame Shahadat Naush Kiya,
Koi Sar Ko Kataye Koi Ghar Ko Lutaye,
Aisa Hai Gharana Hussain Ka
bada Pyaara Hai Nana Hussain Ka
hum Gair Ke Dar Par Kyun Jaye,
Hum Sab Unke Dar Se Paaye,
Ali Wale Chale Aao Daman Ko Failao,
Batta Hai Khazana Hussain Ka
bada Pyaara Hai Nana Hussain Ka
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यह मनमोहक और जोश से भरी मनक़बत हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ (इमाम हुसैन के नाना) की अज़मत और कर्बला में इस्लाम की रक्षा के लिए इमाम हुसैन के पूरे घराने द्वारा दी गई महान क़ुर्बानी और उनकी सख़ावत (दानशीलता) को समर्पित है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि "दुनिया में कोई किसी और का दीवाना हो सकता है, लेकिन मुझे तो इमाम हुसैन के नाना (हुज़ूर ﷺ) ही सबसे ज़्यादा अच्छे लगते हैं, जिनकी शान सबसे अनोखी और ज़ुल्फ़ें काली हैं।" इस घराने ने इस्लाम धर्म (दीन) की रक्षा के लिए अपने घर को लुटा दिया और हँसते-हँसते शहादत का प्याला पी लिया, इसलिए हमें किसी और के दरवाज़े पर जाने की आवश्यकता नहीं है।
| शब्द | हिंदी अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| नाना | माता के पिता (यहाँ तात्पर्य हुज़ूर मुहम्मद ﷺ से है) |
| भाता है | अच्छा लगता है / प्रिय लगता है |
| दीन | धर्म (यहाँ तात्पर्य इस्लाम धर्म से है) |
| जाम-ए-शहादत | शहादत का प्याला / वीरगति का अमृत |
| नोश किया | पिया / ग्रहण किया |
| ग़ैर के दर | पराया दरवाज़ा / किसी दूसरे के पास |
| अली वाले | हज़रत अली को मानने वाले / उनके चाहने वाले |
इस ख़ूबसूरत कलाम का मूल सार यह है कि इमाम हुसैन का पूरा परिवार बेहद सख़ी (दानी) है, जहाँ आकर कोई भी ख़ाली हाथ नहीं लौटता। शायर कहता है कि हज़रत अली और अहल-ए-बेत (नबी के परिवार) से प्यार करने वाले लोग आगे आएं और अपनी झोली फैलाएं, क्योंकि यहाँ हुसैन के करम और बरकत का ख़ज़ाना बंट रहा है। इस पाक घराने ने सच और धर्म की राह में अपना सिर तो कटा दिया, लेकिन बातिल (अधर्म) के आगे कभी घुटने नहीं टेके।
लिरिक्स के मुताबिक, इस्लाम ('दीन') की हिफ़ाज़त के लिए हुसैन के घराने ने क्या किया और उनके दर पर किस चीज़ का ख़ज़ाना बंट रहा है?