मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : अन नबी सल्लू अलैह सलावतुल्लाह अलैह
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ओवैस रज़ा कादरी
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 29 Sep, 2023 07:58 AM IST
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अन नबी सल्लू अलैह
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
अन नबी या हलिरेन, इल्मो इल्मल यक़ीन,
अन्ना रब्बल आलमिन, वा रला सल्ला अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
काबे के बदरुद दुजा, तुम पे करोड़ों दरूद,
ताइबा के शम्सुद दुहा, तुम पे करोड़ों दरूद
शफिये रोज़े जज़ा, तुम पे करोड़ों दरूद,
दफ़िये जम्ला बल, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबी या मं हलर, अन नबी ख़ैरुल बशार,
मन्न लाहु शक्कुल क़मर, वा नाज़िल सल्लिम अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
दिल करो ठंडा मेरा वोह, काफ़े पा चाँद सा,
सीने पे रखदो ज़रा, तुम पे करोड़ों दरूद
ज़ात हुई Intikhab, वसफ़ हुए ला जवाब,
नाम हुआ मुस्तफ़ा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबी ढक़ल उरोस, ज़िक्रहु यूह्यिन नुफ़ूस,
अन नसारा वल मजूस, अस्लमो आला यदाइह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
बे हुनर बे तमीज़, किसके हुए हैं अज़ीज़,
एक तुम्हारे सिवा, तुम पे करोड़ों दरूद
आस है कोई ना पास, इक तुम्हारी है आस,
बस है यहीं आसरा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
सीने के है दाग़ दाग़, कहदो करें बाग़ बाग़,
ताइबा से आके सबा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबिय्युल मुस्तफ़ा, इब्न ज़मज़म वस सफ़ा,
मन ता’ला शरफ़ा, कुल्लुहुम सल्लो अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
अन नबिय्युल मुज्तबा, अन नबी साकिन क़ुबा,
हुब्बुहु ली मज़हब, रब्बना सल्ला अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
तुम से जहाँ का नज़ाम, तुम पे करोड़ों दरूद,
तुम पे करोड़ों सना, तुम पे करोड़ों दरूद,
तुम हो जवादो करीम, तुम हो रौफ़ो रहीम,
भीक हो दाता अता़, तुम पे करोड़ों दरूद,
ख़लक़ के हाकिम हो तुम, रिज़क़ के क़ासिम हो तुम,
तुम से मिला जो मिला, तुम पे करोड़ों दरूद,
नाफ़ी वो दफ़ी हो तुम, शाफ़ी वो राफ़ी हो तुम,
तुम से बस अफ़ज़ोन खुदा, तुम पे करोड़ों दरूद,
शाफ़े वो नाफ़े हो तुम, काफ़े वो दाफ़े हो तुम,
दर्द को करदो दवा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
बरसे करम की भरन, भूले नियम के चमन,
ऐसी चला दो हवा, तुम पे करोड़ों दरूद,
क्यों कहूँ बे कस हूँ मैं, क्यों कहूँ बे बस हूँ मैं,
तुम हो मैं, तुम पे फ़िदा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबी ढक़ल मालेह, क़वालहु क़ावलु साहिह,
वल कुरआन शायुन फसेह, अल्लादे उनज़िल अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
करके तुम्हारे गुनाह, माँगे तुम्हारी पनाह,
तुम कहो दामन में आ, तुम पे करोड़ों दरूद,
हम ने खता में ना की, तुम ने अता़ में ना की,
कोई कमी सरवरा, तुम पे करोड़ों दरूद
आँख अता कीजिए, उस में ज़िया दीजिए,
जलवा क़रीब आगया, तुम पे करोड़ों दरूद
कम वोह ले लीजिए, तुमको जो रज़ी करे,
ठीक हो नाम-ए-रज़ा, तुम पे करोड़ों दरूद
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
वल हसन तुम्मल हुसैन, लिन नबी रायहानतैन,
फ़ातिमा क़ुर्रतुल्औ ऐन, जद्दुहुम सल्लो अलैह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह.. अल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
ये उबैद अदना गुलाम, तेरा है ख़ैरुल अनाम,
वक़्त मिह्दत के लिए, इस की हो उम्र तामाम
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
या रसूलल्लाह या रसूलल्लाह
या हबीबल्लाह या हबीबल्लाह
अन नबी सल्लू अलैह, सलावतुल्लाह अलैह,
वा यनालुल बरकह, कुल्लु मन्न सल्ला अलैह
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यह प्रसिद्ध कलाम और सलाम हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की शान में अक़ीदत का नज़राना है, जिसमें उनके गुणों की प्रशंसा और उन पर निरंतर दरूद भेजने का आह्वान किया गया है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि जो भी नबी ﷺ पर दरूद (सलात) भेजता है, वह अल्लाह की बरकतों का पात्र बनता है क्योंकि हुज़ूर ﷺ ही समस्त सृष्टि के लिए रहमत हैं। शायर कहता है कि आप ﷺ कयामत के दिन पापियों की सिफ़ारिश (शफ़ाअत) करने वाले, दुखों को दूर करने वाले और समस्त मानवता के लिए सर्वोत्तम मार्गदर्शक (ख़ैरुल बशर) हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| यनालुल बरकह | बरकत हासिल करना |
| बदरुद दुजा | अंधेरी रात का पूर्ण चंद्रमा |
| शफ़िये रोज़े जज़ा | कयामत के दिन सिफ़ारिश करने वाला |
| दाफ़िये जम्ला बला | तमाम मुसीबतों को टालने वाला |
| ख़लक़ के हाकिम | सृष्टि के शासक/स्वामी |
| रिज़क़ के क़ासिम | जीविका (अन्न) बाँटने वाले |
| मिह्दत | प्रशंसा या गुणगान |
इस कलाम का सार यह है कि पूरी दुनिया का निज़ाम और बरकत हुज़ूर ﷺ के सदक़े में है। शायर उन्हें 'जवादो करीम' (अत्यंत उदार) और 'रौफ़ो रहीम' (दयालु) पुकारते हुए अपने गुनाहों की माफ़ी और दुखों की दवा माँगता है। अंत में भक्त (उबैद/रज़ा) यह कामना करता है कि उसका पूरा जीवन नबी ﷺ की प्रशंसा करने में व्यतीत हो और उसे उनके चरणों में स्थान मिले।
शायर ने नबी ﷺ को "रिज़्क के क़ासिम" और "दाफ़िये जुमला बला" क्यों कहा है?