search
लॉग इन
Get latest updates On WhatsApp

आँखें रो रो के सूजाने वाले Lyrics In हिन्दी

(आँखें रो रो के सूजाने वाले, जाने वाले नहीं आने वाल)


Written By

avatar
Shan E Nabi Team Desk
  • Editors Desk
  • Addednot available
  • visibilityबार देखा गया
  • comment टिप्पणियाँ
  • thumb_up0 likes
  • shareशेयर
...

टाइटल : आँखें रो रो के सूजाने वाले

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 31 Jul, 2023 10:49 AM IST

बार देखा गया : 226

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

आँखें रो रो के सूजाने वाले,
जाने वाले नहीं आने वाले।

सुन ले आदा मैं बिगड़ने का नहीं,
वो सलामत हैं बनाने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

आँखें कुछ कहती हैं तुझसे पैग़ाम,
ओ दर-ए-यार के जाने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

फिर न करवट ली मदीने की तरफ़,
अरे चल, झूठे बहाने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

नफ़्स में ख़ाक हवा तू न मिटा,
है मेरी जान के खाने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

हुस्न तेरा-सा न देखा न सुना,
कहते हैं अगले ज़माने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

वही धूम है उनकी, माशा अल्लाह,
मिट गए आप मिटाने वाले।

जाने वाले नहीं आने वाले।

क्यों रज़ा आज गली सूनी है,
उठ मेरे धूम मचाने वाले।

आँखें रो रो के सूजाने वाले,
जाने वाले नहीं आने वाले।

wand_stars
Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

keyboard_arrow_down

यह अत्यंत भावपूर्ण और प्रसिद्ध नात-ए-पाक (आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी द्वारा रचित) पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के वियोग के दुःख, उनके प्रति अटूट श्रद्धा और उनकी शाश्वत महिमा का सुंदर वर्णन करती है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हे नबी ﷺ के विरह में रो-रोकर अपनी आँखें सुजाने वाले आशिक, जो इस दुनिया से विदा हो गए वे पुनः लौटकर नहीं आते, अतः अपने मन को मदीने की याद में शांत कर। शायर विरोधियों (आदा) को चुनौती देते हुए कहता है कि तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि मुझे और मेरी क़िस्मत को बनाने वाले स्वयं अल्लाह और उनके रसूल ﷺ सलामत हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
आदादुश्मन / विरोधी
दर-ए-यारमहबूब की चौखट (मदीना शरीफ़)
नफ़्समन की इच्छाएँ / अहंकार (इंसान का अंदरूनी शत्रु)
ख़ाकमिट्टी
हुस्नसौंदर्य / रूप
धूमप्रसिद्धि / चर्चा या शौहरत
रज़ाआला हज़रत का तख़ल्लुस (उपनाम)

सारांश (Summary)

इस नात का मुख्य सार यह है कि संसार में पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ की महिमा और उनका डंका युगों-युगों से बज रहा है और जो लोग उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना चाहते थे, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिटकर ख़ाक हो गए। शायर अपने मन (नफ़्स) को फटकारता है कि वह मदीने की ओर रुख करने के झूठे बहाने न बनाए। अंत में आला हज़रत स्वयं को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे नबी की गलियों में अपनी नात से धूम मचाने वाले शायर, उठ और फिर से रसूल की शान का गुणगान कर।

लिरिक्स के मुताबिक, नबी-ए-करीम ﷺ की शान को मिटाने की कोशिश करने वालों का क्या अंजाम हुआ?

Read more ↓
Was this page helpful?
शेयर: