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आँखे भीगो के सबको रुला कर चले गए Lyrics In हिन्दी

(आँखे भीगो के सबको रुला कर चले गए, ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : आँखे भीगो के सबको रुला कर चले गए

श्रेणी (कटेगरी) : मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 10 Nov, 2022 01:35 PM IST

बार देखा गया : 2.9K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

आँखे भीगो के दिलको हिला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए
आँखे भीगो के सबको रुला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

इफ्ता की शान इल्मो हुनर का वकार थे,
सदा मिजाज़ ज़िंदा दिली की बहार थे
महफ़िल हर एक सुनी बना कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

उमर-ए-तमाम दीन की खिदमत में काट दी,
अपने कलम से कुफ्र की तारीख छाठ दी
हुक्म-ए-शरीयत हमको बता कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

दीन-ए-नबी की खिदमते मकबूल हो गई,
सीनों में उनकी उल्फते महफूज हो गई
दीवाना अपना सबको बना कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

एलान सेहरी जिसने बहेड़ी को दे दिया,
और फिर जुलूस-ए-बारहवी भी अता किया
तहरीक कैसी कैसी चला कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

सुल्तान अशरफ इस्म भी साया निशाँन था,
हर एक लेहाज़े से जो बहेड़ी की जान थी
कैसा पहाड़ गम का गिरा कर चले गए,
ऐसे गए के सबको रूला कर चले गए

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मनक़बत बहेड़ी (बरेली) के एक अज़ीम आलिम-ए-दीन 'सुल्तान अशरफ़' के विसाल (देहांत) पर लिखी गई एक शोकमय नज़्म है, जिसमें उनकी सादगी, दीनी ख़िदमात और उनके जाने से पैदा हुए गहरे ग़म को बयां किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस कलाम का मतलब है कि बहेड़ी की जान और इल्म-ओ-हुनर की शान, सुल्तान अशरफ़ साहब इस दुनिया से रुख़सत हो गए हैं, जिससे हर आँख नम है। उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी लोगों को शरीयत का रास्ता दिखाने और अपनी क़लम से बतलाई (बुराई) के अंधेरों को छांटने में गुज़ार दी, और उनके जाने से हर महफ़िल सूनी हो गई है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
इफ़्ता (Ifta)फ़तवा जारी करने का इल्म (Islamic jurisprudence)
वक़ार (Waqar)सम्मान, गौरव या इज़्ज़त (Dignity/Honor)
सदा मिज़ाज़सादगी पसंद / सरल स्वभाव (Simple-natured)
तारीख़ (Tarikh)यहाँ अर्थ 'अंधेरा या कालापन' से है (Darkness)
उल्फ़त (Ulfat)प्रेम, स्नेह या मोहब्बत (Love/Affection)
मक़बूल (Maqbool)स्वीकार की गई / पसंदीदा (Accepted)
तहरीक (Tahrik)आंदोलन या अभियान (Movement)
इस्म (Ism)नाम (Name)

सारांश (Summary)

शायर इस नज़्म में बयां करते हैं कि हज़रत सुल्तान अशरफ़ ने बहेड़ी के इलाक़े में 'सेहरी का ऐलान' और 'जुलूस-ए-मोहम्मदी (बारहवीं का जुलूस)' जैसी कई अहम दीनी तहरीकें (अभियान) शुरू कीं। उनके इस दुनिया से चले जाने से हर तरफ़ ग़म का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि वह लोगों के दिलों में नबी ﷺ के दीन की सच्ची मोहब्बत और सीख छोड़ कर गए हैं।

मनक़बत के मुताबिक 'सुल्तान अशरफ़' ने बरेली में कौन-कौन सी अहम तहरीक (आंदोलन) चलाई थीं, और उनकी ज़िंदगी किस काम में गुज़र गई?

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