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आमिना के घर मा है हुरन का मेला Lyrics In हिन्दी

(आमिना के घर मा है हुरन का मेला, सगरो अटरिया जगर मगर होवे)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : आमिना के घर मा है हुरन का मेला

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: विविध/अज्ञात

जोड़ा गया : 28 Mar, 2023 11:34 AM IST

बार देखा गया : 1.6K

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

आमिना के घर मा है हुरन का मेला
सगरो अटरिया जगर मगर होवे
बन के खिलौना मोरे नबी का अमबर पे चँदवा इधर उधर होवे

डोलत है खेतवन मा बागे बहारी
झूमत है पेड़वन के हर डाली डाली 
कोहराम बरपा है आतिश कदन मा
बूतवन का गुड़वा डगर मगर होवे

आमिना के घर मा है हुरन का मेला
सगरो अटरिया जगर मगर होवे
बन के खिलौना मोरे नबी का अमबर पे चँदवा इधर उधर होवे

अइसन नबी कोई आवा न आयी
इ मरतबा कोई पावा न पायी
बरसे सवनवा रब के करम का
उन के नजरिया जिधर जिधर होवे

आमिना के घर मा है हुरन का मेला
सगरो अटरिया जगर मगर होवे
बन के खिलौना मोरे नबी का अमबर पे चँदवा इधर उधर होवे

बाजत है कलमे की हरसू बसुरिया
दोनों जगत मा है फैली उजरिया
कर दें दया जो शाहे मदीना
ख़ुशियनं में सबका गुजर बसर होवे

आमिना के घर मा है हुरन का मेला
सगरो अटरिया जगर मगर होवे 
बन के खिलौना मोरे नबी का अमबर पे चँदवा इधर उधर होवे

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह अवधी और भोजपुरी के सुंदर लोक-रंग में रचित मिलाद की एक अत्यंत मनभावन नात शरीफ़ है। इसमें हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के जन्म (विलादत) के समय पूरी कायनात में छाए उल्लास, अद्भुत चमत्कारों और उनकी बेमिसाल अज़मत को बहुत ही सरल और मीठे शब्दों में पिरोया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हज़रत आमिना के घर जब हमारे नबी ﷺ का आगमन हुआ, तो उनके स्वागत में जन्नत की हूरों का मेला लग गया और पूरा घर-आँगन (अटरिया) रोशनी से जगमगा उठा। उस समय एक महान चमत्कार हुआ कि आसमान का चाँद नबी ﷺ के लिए एक खिलौना बन गया, जो उनके इशारे पर आसमान (अम्बर) में इधर-उधर घूमने लगा; साथ ही बातिल के सारे बुत (मूर्तियाँ) ढह गए।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (लोक-भाषा)हिंदी अर्थ (Meaning)
हुरनहूरें / जन्नत की अप्सराएँ
सगरो अटरियापूरा घर / छत या घर का आँगन
जगर मगरजगमग-जगमग / चमकदार रोशनी
अमबर / चँदवाआकाश / चंद्रमा या चाँद
आतिश कदनईरान के वे अग्नि-मंदिर (पारसी पूजा स्थल) जो नबी के जन्म पर बुझ गए थे
बूतवन का गुड़वामूर्तियों का ढांचा / मिट्टी की पुतलियाँ या बुत
मरतबापद / सम्मान या ऊँचा स्थान
उजरियाउजियारा / पवित्र प्रकाश या रोशनी
शाहे मदीनामदीने के सुल्तान (हुज़ूर ﷺ)

सारांश (Summary)

इस सुंदर नात का मूल सार यह है कि हुज़ूर ﷺ जैसा महान नबी न तो इस संसार में कभी आया है और न ही कोई दूसरा उनके जैसा सर्वोच्च मर्तबा पा सकता है। उनके आगमन से दोनों जहानों में एकेश्वरवाद (कलमे) का उजाला फैल गया है और प्रकृति का कण-कण झूम रहा है। अंत में शायर प्रार्थना करता है कि यदि मदीने के सुल्तान (आक़ा ﷺ) अपनी दया-दृष्टि कर दें, तो संसार के हर ग़रीब और बेबस इंसान का जीवन ख़ुशियों के साथ बीतेगा।

लिरिक्स के मुताबिक, आसमान का 'चाँदवा' (चाँद) नबी ﷺ के लिए क्या बन गया है और वह आसमान पर कैसे चल रहा है?

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