मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : आला हज़रत हमारी जान है
श्रेणी (कटेगरी) : कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स) नात के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : ओवैस रज़ा कादरी
नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी
जोड़ा गया : 13 Sep, 2023 06:13 PM IST
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इश्क़-ओ-मोहब्बत, इल्म-ओ-हिकमत,
आला हज़रत, आला हज़रत
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
मेरा अहमद रज़ा ज़ीशान है,
उन के मस्लक पे जाँ क़ुर्बान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
उन के दीवान का एक एक हर्फ़,
इश्क़-ए-अहमद का एक उनवान है
इश्क़-ओ-मोहब्बत, इल्म-ओ-हिकमत,
आला हज़रत, आला हज़रत
ज़िक्र उन का कसौटी बन गया,
सुन्नियत की बड़ी पहचान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
उन के मस्लक पे रख क़ाइम मुझे,
तुझ से मेरी दुआ, रहमान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
शाइरी देखिए तो यूँ लगे,
जारी हस्सान का फ़ैज़ान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
उस ने जो भी लिखा ऐसा लिखा,
अक़्ल-ए-अहल-ए-क़लम हैरान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
मैं उबैद-ए-रज़ा हूँ जान लो,
आला हज़रत मेरी पहचान है
आला हज़रत हमारी जान है,
आला हज़रत हमारी जान है
इश्क़-ओ-मोहब्बत, इल्म-ओ-हिकमत,
आला हज़रत, आला हज़रत
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यह मनकबत इमाम अहमद रज़ा खान (आला हज़रत) की इल्मी महारत और हुज़ूर ﷺ के प्रति उनके अटूट प्रेम को समर्पित है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि आला हज़रत की हस्ती ज्ञान (इल्म) और विवेक (हिकमत) का खजाना है। उनकी लिखी शायरी और शब्द हुज़ूर ﷺ की मोहब्बत का एक अध्याय (उनवान) हैं, जिसमें हज़रत हस्सान बिन साबित (र.आ.) जैसी रूहानी झलक दिखाई देती है।
| शब्द | अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| हिकमत | बुद्धिमानी या तत्वज्ञान (Wisdom) |
| मस्लक | रास्ता या विचारधारा (Path/Ideology) |
| उनवान | शीर्षक या अध्याय (Title/Chapter) |
| क़ाइम | स्थिर या अटल रहना (Firm/Steadfast) |
| अहल-ए-क़लम | लेखक या विद्वान (Scholars/Writers) |
| उबैद | छोटा सेवक या ग़ुलाम (Small servant) |
इस कलाम का सार यह है कि आला हज़रत की पहचान उनका 'इश्क़-ए-रसूल' है। शायर अल्लाह से दुआ करता है कि उसे आला हज़रत के बताए रास्ते पर अटल रखे, क्योंकि उनकी शायरी और इल्म ने दुनिया के बड़े-बड़े विद्वानों को हैरान कर दिया है और यही सुन्नियत की असली पहचान है।
शायर ने आला हज़रत की शायरी को किसके 'फ़ैज़ान' से जुड़ा बताया है?