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Ya Rasool Allah Ya Nabi Allah Ya Habib Allah Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : Ya Rasool Allah Ya Nabi Allah Ya Habib Allah

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 18 Apr, 2023 09:26 PM IST

बार देखा गया : 1.3K

Time to read: 1 min read

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is Mohabbat Ka Haq Na Ada Kar Sake
Sab Kiya Tune, Ham Kuchh Bhi Na Kar Sake

KHushk Sajde Kiye, KHoob Maatha Ghisa
Aur Peshaani Pe DaaG-e-sajda Pa.Da

Qalb DaaG-e-mohabbat Se KHaali Raha
Aise Maatha Ghisaane Se Kya Faaida

Allahu Rabbu Muhammadin
Salla 'alaihi Wa Sallama
Nahnu 'ibaadu Muhammadin
Salla 'alaihi Wa Sallama

Ya Nabiyallah ! Ya Habiballah !
Do Jahaa.n Ke Taajdaar Hai.n
Muhammad-ur-rasoolullah

Ya Nabiyallah ! Ya Habiballah !
Mahboob-e-parwardigaar Hai.n
Muhammad-ur-rasoolullah

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नबी करीम ﷺ की अज़मत और उनके प्रति अगाध प्रेम (इश्क़-ए-रसूल) में डूबा हुआ एक बेहद रूहानी और भावुक नातिया कलाम है, जो इंसान को दिखावे की इबादत छोड़कर दिल में सच्चा प्रेम जगाने की प्रेरणा देता है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हज़रत मुहम्मद ﷺ दोनों जहान के सुल्तान (ताजदार) और स्वयं ईश्वर (परवरदिगार) के सबसे प्रिय महबूब हैं। यदि उनका अस्तित्व न होता तो यह सृष्टि ही न होती, क्योंकि वे पूरे ब्रह्मांड की आत्मा हैं। कवि का मानना है कि ईश्वर से उनकी निकटता ऐसी है कि वे न तो स्वयं भगवान हैं और न ही भगवान से अलग हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
ताजदार / परवरदिगारराजा या शासक / ईश्वर या पालनहार
आलम / फ़िदासंसार या ब्रह्मांड / न्योछावर या मोहित होना
कशफ़-द्दुजा(उनके सौंदर्य ने) अंधेरे को दूर कर दिया
क़ल्ब / शौक़-ए-तयबाहृदय या दिल / मदीना जाने की चाहत
विर्दबार-बार जपना या सुमिरन करना
तुर्फ़ा धूम-धामअनोखी रौनक या अनोखा उत्सव

सारांश (Summary)

इस कलाम का मुख्य सार यह है कि इस्लाम में केवल दिखावे के सजदे करने, माथे पर गट्टा (निशान) डालने या बिना प्रेम के मक्का जाने का कोई आध्यात्मिक लाभ नहीं है, जब तक कि दिल में पैग़ंबर ﷺ के प्रति सच्चा इश्क़ न हो। आक़ा ﷺ ने मेराज की रात ईश्वर से मुलाक़ात के समय भी अपनी गुनहगार उम्मत (अनुयायियों) को याद किया और उनके आँसुओं ने ही हमारी क़िस्मत बदली है। अंत में, कवि स्वीकार करता है कि हम नबी के उपकारों का ऋण कभी नहीं चुका सकते, इसलिए हमारा हर पल केवल उन पर दरूद (सल्लू अलैहि व आलिहि) भेजने में बीतना चाहिए।

लिरिक्स के मुताबिक, अगर दिल में किसका इश्क़ न हो, तो कलमा सुनने और सुनाने से क्या फ़ायदा?

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