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वो शहरे मोहब्बत जहां मुस्तफा है Lyrics In हिन्दी

(वो शहरे मोहब्बत जहां मुस्तफा है, वही घर बनाने को जी चाहता है)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : वो शहरे मोहब्बत जहां मुस्तफा है

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: शाहिद रज़ा अशरफ़ी

जोड़ा गया : 09 Feb, 2023 12:36 PM IST

बार देखा गया : 18.6K

Time to read: 1 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

वो शहरे मोहब्बत जहां मुस्तफा है
वही घर बनाने को जी चाहता है
वो सोने के कंकर वो सोने की मिट्टी
नज़र में बसाने को दिल चाहता है

जो पूछा नबी ने के कुछ घर भी छोड़ा
तो सिद्दिके अकबर के होंटों पे आया
वह मालों दौलत की क्या है हकीकत
जहां जान लूटाने को दिल चाहता है

वो नन्हा सा असगर वो एडी रगड़ कर
यही कह रहा है वो खेमे मे रोकर
ऐ बाबा मैं पानी का प्यासा नहीं हूँ
मेरा सर कटाने को दिल चाहता है

सितारों से यह चंद कहता है हर दम
तुम्हें क्या बताये वो टुकड़ों का आलम
इशारे में आका के इतना मज़ा था
के फिर टूट जाने को दिल चाहता है

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात-ए-पाक और मनक़बत का एक बेहद ख़ूबसूरत संगम है, जिसमें मदीना शरीफ़ की पावन धरती के प्रति अगाध प्रेम, ग़ज़वा-ए-तबूकर में हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ का सर्वोच्च त्याग, कर्बला के मासूम हज़रत अली असग़र की शहादत का जज़्बा और नबी ﷺ के महान मोज़िज़े (चमत्कार) का वर्णन किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन रूहानी पंक्तियों का अर्थ है कि "मेरा दिल उस प्रेम की नगरी (मदीना मुनव्वरा) में अपना परमानेंट आशियाना बनाने को तड़प रहा है जहाँ हमारे आक़ा मुस्तफ़ा ﷺ आराम फ़रमा रहे हैं, और वहाँ की सोने जैसी पावन मिट्टी और कंकड़ों को आँखों का सूरमा बनाने का जी चाहता है।" शायर कहता है कि जहाँ रसूल की मोहब्बत में अपनी जान तक न्योछावर करने का जज़्बा हो, वहाँ धन-दौलत की कोई बिसात या अहमियत नहीं रह जाती।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दहिंदी अर्थ (Meaning)
शहरे मोहब्बतप्रेम की नगरी (मदीना शरीफ़)
कंकरछोटे-छोटे पत्थर
सिद्दिके अकबरहज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (इस्लाम के पहले ख़लीफ़ा)
हकीकतअसलियत या मूल्य (अहमियत)
असग़र / खेमेहज़रत अली असग़र (६ महीने के मासूम) / तंबू (शिविर)
आलमदशा, नज़ारा या स्थिति
मोज़िज़ाचमत्कार (ईश्वरीय शक्ति से होने वाला कार्य)

सारांश (Summary)

इस मुक़द्दस कलाम का मूल सार यह है कि सच्चे मोमिन के लिए नबी ﷺ का इश्क़ ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है, जैसा कि हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ ने घर का सारा सामान अल्लाह और उसके रसूल की राह में लुटाकर साबित किया था। नात में कर्बला का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि ६ महीने के मासूम अली असग़र प्यास से तड़पते हुए भी अपनी एड़ियाँ रगड़कर दीन पर सर कटाने का हौसला रखते हैं। अंत में हुज़ूर ﷺ के 'शक्कुल क़मर' (चाँद के दो टुकड़े करने के) मोज़िज़े का ज़िक्र करते हुए चाँद कहता है कि आक़ा के उँगली के इशारे में ऐसा रूहानी आनंद था कि मेरा दिल फिर से टूटकर बिखर जाने को चाहता है।

लिरिक्स के आखिरी हिस्से के मुताबिक, चांद ने सितारों से नबी ﷺ के किस मोज़िज़े (चमत्कार) का ज़िक्र किया है?

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