मुस्तफ़ा का प्यारा है फ़ातिमा का शहज़ादा
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टाइटल : वो रज़ा मेरा रज़ा मेरा रज़ा मेरा रज़ा है
श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स) कलाम के बोल (लीरिक्स) मनकबत के बोल (लीरिक्स)
लेखक/गीतकार : सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
नातख्वान/कलाकार: सज्जाद निज़ामी (मरहूम)
जोड़ा गया : 24 Sep, 2022 02:28 PM IST
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वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो इमाम 'इश्क़-ओ-मोहब्बत है बरेली का रज़ा
जिस ने कोई न किया काम है सुन्नत के सिवा
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वाज़ेह सभी पे आयत-ए-क़ुरआन कर गया
महफूज़ सुन्नियों का जो ईमान कर गया
एहसान का न जिस के कोई भी हिसाब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
उठा क़लम तो 'इल्म के दरिया बहा दिए
घर घर नबी के ज़िक्र के जल्से सजा दिए
सर-ता-बा 'इल्म-ए-दीन का जो आफ़ताब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
जिस की हयात 'इश्क़-ए-नबी की किताब है
जिस का वुजूद वक़्फ़-ए-रिसालत-मआब है
जिस में नबी की ख़ुश्बू है ऐसा ग़ुलाब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
हर दम चमकता और दमकता रहेगा वो
दुनिया-ए-सुन्नियत में महकता रहेगा वो
जिस में नबी की ख़ुश्बू है ऐसा ग़ुलाब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
गुस्ताख़ी-ए-रसूल का नश्शा उतार दें
हम चाहें तो इसी से वहाबी को मार दें
अहमद रज़ा के नाम में वो आब-ओ-ताब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
उर्दू अदब की जान है और शान है रज़ा
ना'त-ए-नबी का हिन्द में हस्सान है रज़ा
नग़्मों में जिस के हुब्ब-ए-नबी की शराब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
अहमद रज़ा ने कंज़-उल-ईमान है दिया
हम को रसूल-ए-पाक का फ़ैज़ान है दिया
जो मस्लक-ए-रज़ा पे चले, कामियाब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
अख़्तर रज़ा का दामन-ए-शफ़क़त न छोड़िये
कुछ भी हो दस्त-ए-ताज-ए-शरी'अत न छोड़िये
वल्लाह ! फ़ख़्र-ए-अज़हरी 'इज़्ज़त-मआब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
होता है जिस का ज़िक्र ज़माने में कू-ब-कू
शोहरत है जिस के फ़त्वे की, तक़्वे की चार-सू
सज्जाद ! हर इमाम का वो इंतिख़ाब है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
वो रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा, मेरा रज़ा है
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यह बेहद ओजस्वी और अक़ीदत से भरी मन्क़बत मुजद्दिद-ए-दीन-ओ-मिल्लत आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी की महान धार्मिक व साहित्यिक सेवाओं, उनकी ज्ञानपरकता और उनके असीम इश्क़-ए-रसूल का एक शानदार वर्णन है।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि बरेली के इमाम अहमद रज़ा ख़ान प्रेम और सद्भाव के वह प्रतीक हैं, जिन्होंने पैगंबर ﷺ की सुन्नत के अलावा कोई कार्य नहीं किया। जब उन्होंने अपनी कलम उठाई तो ज्ञान के महासागर बहा दिए, प्रत्येक घर में नबी के ज़िक्र की महफ़िलें सजाईं और क़ुरआन की आयतों को इस तरह स्पष्ट (वाज़ेह) किया कि आम सुन्नी मुसलमानों की आस्था और ईमान सुरक्षित हो गया।
| शब्द | अर्थ (Hindi) |
|---|---|
| वाज़ेह | स्पष्ट / साफ़ |
| आफ़ताब | सूर्य / सूरज |
| हयात | जीवन / ज़िंदगी |
| वक़्फ़ | समर्पित / न्योछावर |
| आब-ओ-ताब | चमक-दमक / प्रताप या तेज |
| हस्सान | हज़रत हस्सान बिन साबित (र.अ.) (नबी ﷺ के प्रिय ना'त-ख़्वान/कवि) |
| फ़ैज़ान | कृपा / बरकत या आध्यात्मिक लाभ |
| चार-सू | चारों तरफ़ / चारों दिशाओं में |
कवि कहता है कि आला हज़रत का पूरा जीवन पैगंबर ﷺ के प्रेम की एक जीवित किताब है और उनका अस्तित्व नबी की महक से महकता हुआ गुलाब है। उन्होंने उर्दू साहित्य (अदब) को संवारा और भारत में ना'त-गोई (प्रशंसा-काव्य) के शीर्ष कवि बने। उनके द्वारा दिए गए 'कंज़-उल-ईमान' (क़ुरआन का अनुवाद) और उनके बताए मार्ग (मसलक-ए-रज़ा) पर चलने वाले ही सफल हैं; अंत में उनके वंशज ताजुश्शरिया हज़रत अख़्तर रज़ा ख़ान के मार्गदर्शन में रहने की सीख दी गई है।
शायर के अनुसार, आला हज़रत ने दीन-ए-इस्लाम और आशिकों को क़ुरआन-ए-पाक का कौन सा महान अनुवाद (Tarjuma) तोहफ़े में दिया है?