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वस्फ ए रुख़ उनका किया करते हैं Lyrics In हिन्दी

(वस्फ-ए-रुख़ उनका किया करते हैं, शर्ह-ए-वश शम्स ओ दुहा करते हैं)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : वस्फ-ए-रुख़ उनका किया करते हैं

श्रेणी (कटेगरी) : नज़्म के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 21 Mar, 2024 03:04 PM IST

बार देखा गया : 377

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

वस्फ-ए-रुख़ उनका किया करते हैं,
शर्ह-ए-वश शम्स ओ दुहा करते हैं,
उनकी हम मद्ह-ओ-सना करते हैं,
जिनको महमूद कहा करते हैं

तू है ख़ुर्शीद-ए-रिसालत प्यारे,
छुप गए तेरी ज़िया में तारे,
अंबिया और हैं सब महपारे,
तुझ से ही नूर लिया करते हैं

अपने मौला की है बस शान अज़ीम,
जानवर भी करे जिनकी ताज़ीम,
संग करते हैं अदब से तस्लीम,
पेड़ सजदे में गिरा करते हैं

उंगलियां पाई वो प्यारी प्यारी,
जिनसे दरिया-ए-करम है जारी,
जोष पर आती है जब ग़मख़्वारी,
इसमें सैराब हुआ करते हैं

रिफ़अत-ए-ज़िक्र है तेरा हिस्सा,
दोनों आलम में है तेरा चर्चा,
मुरग़-ए-फ़िर्दौस ब सद हम्द-ए-ख़ुदा,
तेरी ही मद्ह-ओ-सना करते हैं

हाँ यही करती है चिड़िया फ़रियाद,
यही से चाहती है हिरनी दाद,
इसी दर पर शुत्रान-ए-ना-शाद,
गिला-ए-रंज-ओ-एना करते हैं

आस्तीं रहमत-ए-आलम उल्टे,
कमरे पाक पे दामन बांधे,
गिरने वालों को कुचा-ए-दोज़ख़ से,
साफ़ अलग खींच लिया करते हैं

जब सबा आती है तैयबा से इधर,
खिलखिला पड़ती हैं कलियां यकसर,
फूल जामे से निकल कर बाहर,
रुख़-ए-रंगी की सना करते हैं

जिसके जल्वे से उहुद है तबा,
मादान-ए-नूर है उसका दमा़,
हम भी उस चाँद पे होकर क़ुर्बा,
दिल-ए-संग़ी की जिला़ करते हैं

तू है वो बादशाह-ए-कौन-ओ-मका,
कि मलाक हफ़्त फ़लक के हर आ,
तेरे मौला से शाह-ए-अर्श ऐवा,
तेरी दौलत की दुआ करते हैं

क्यूँ न ज़ेबा हो तुझसे ताजवारी,
तेरे ही दम की है सब जल्वा गारी,
मलक ओ जिन्न ओ बशर हूर ओ परी,
जान सब तुझ पे फ़िदा करते हैं

अपने दिल का है उन्हीं से आराम,
सौंपे हैं अपने उन्हीं को सब काम,
लौ लगी है कि अब उस दर के ग़ुलाम,
चारा-ए-दर्द-ए-रज़ा करते हैं

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह उच्च स्तरीय कलाम इमाम अहमद रज़ा खान (आला हज़रत) द्वारा रचित है, जिसमें नबी-ए-करीम ﷺ के नूरानी चेहरे, उनके चमत्कारों और पूरी कायनात पर उनके परोपकार का अत्यंत साहित्यिक वर्णन किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

शायर कहता है कि हुज़ूर ﷺ के चेहरे की चमक सूरज और सुबह की रोशनी जैसी है। आप ﷺ रिसालत के वह सूरज हैं जिसके सामने बाकी सब तारे (अन्य नबी) चाँद के टुकड़ों की तरह आपसे ही रोशनी पाते हैं। आपकी उँगलियों से पानी के चश्मे जारी होते हैं और आप गिरते हुए गुनहगारों को दोज़ख़ की आग से बचा लेते हैं।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
वस्फ-ए-रुख़चेहरे की प्रशंसा
ख़ुर्शीद-ए-रिसालतपैग़म्बरी का सूरज
ज़ियाप्रकाश या चमक
महपारेचाँद के टुकड़े
ताज़ीमसम्मान या आदर
रिफ़अत-ए-ज़िक्रनाम की बुलंदी (ऊँचाई)
शुत्रान-ए-ना-शाददुखी ऊँट
कुचा-ए-दोज़ख़नर्क की गली
यकसरपूरी तरह से / अचानक

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों, पेड़ों और पत्थरों के लिए भी रहमत हैं। पूरी कायनात उन्हीं के नूर से रौशन है और अंत में वही अपने चाहने वालों के दुखों का उपचार (चारा) करते हैं और उनकी शफ़ाअत (सिफारिश) फरमाते हैं।

नात के आखिरी मिसरे में शायर "रज़ा" ने अपने दिल के आराम और अपने तमाम कामों के हवाले से क्या कहा है, और वो किस उम्मीद में उस दर के गुलाम बने हुए हैं?

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