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वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा Lyrics In हिन्दी

(वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा, नहीं सुनता ही नहीं मांगने वाला तेरा)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 10 Jun, 2023 03:47 AM IST

बार देखा गया : 555

Time to read: 4 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा,
नहीं सुनता ही नहीं मांगने वाला तेरा।

मैं तो मालिक ही कहूँगा कि हूँ मालिक-ए-हबीब,
यानी महबूबो मुहीब में नहीं मेरा तेरा।

वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा,
नहीं सुनता ही नहीं मांगने वाला तेरा।

तेरे टुकड़ों पे पले ग़ैर की ठोकर में ना डाल,
झिड़कियाँ खाए कहाँ छोड़ के सदका तेरा।

तेरे क़दमों में जो है ग़ैर का मुँह क्या देखे,
कौन नज़रों पे चढ़े देख के तलवा तेरा।

धारें चलती हैं अता की वो है क़तरा तेरा,
तारे खिलते हैं सख़ा के वो है ज़र्रा तेरा।

फ़ैज़ है या शहे तसनीम निराला तेरा,
आप प्यासों के तजस्सुस में है दरिया तेरा।

आगनियाँ पलते हैं दर से वो है बड़ा तेरा,
असफ़िया चलते हैं सर से वो है रास्ता तेरा।

फ़र्श वाले तेरी शौकत का उलू क्या जाने,
खुसरवा अर्श पे उड़ता है फहरता तेरा।

आसमान-ख्वान, ज़मीन-ख्वान ज़माना मेहमान,
साहिबे-ख़ाना लक़ब किसका है — तेरा तेरा।

कौन नज़रों पे चढ़े देख के तलवा तेरा,
बहर-ए-सैल का हूँ सैल न कुएँ का प्यासा,
ख़ुद बुझा जाए कलेजा मेरा चीता तेरा।

चोर हाकिम से छुपा करता है या उसके ख़िलाफ़,
तेरे दामन में छुपे चोर अनोखा तेरा।

सच्चे सूरज वो दिल-आरा है उजाला तेरा,
एक मैं क्या, मेरे इसयां की हक़ीक़त कितनी,
मुझसे सौ लाख को काफ़ी है इशारा तेरा।

मुफ़्त पाला था कभी काम की आदत न पड़ी,
अब अमल पूछते हैं — हाय निकम्मा तेरा।

तेरे टुकड़ों से पले ग़ैर की ठोकर पे ना डाल,
झिड़कियाँ खाए कहाँ छोड़ के सदका तेरा।

ख्वारो बीमारो खतावारो गुनहगार हूँ मैं,
राफ़े’ओ नाफे’ओ शाफे’ लक़ब आका तेरा।

तेरी तक़दीर बुरी हो तो भली कर दे की है,
मह्व-ओ-इस्बात के दफ़्तर में क़दर्दा तेरा।

तू जो चाहे तो अभी मैल मेरे दिल के धुले,
कि खुदा दिल नहीं करता कभी मैला तेरा।

किसका मुँह ताकिए, कहाँ जाइए, किससे कहिए,
तेरे ही क़दमों पे मिट जाए ये पाला तेरा।

तू ने इस्लाम दिया आका, तू ने जमाअत में लिए,
तू करीम, अब कोई फिरता है अतिया तेरा।

दूर क्या जानिए बदकार पे कैसे गुज़रे,
तेरे ही दर पे मरे बेकसों तन्हा तेरा।

तेरे सद्के मुझे एक बूंद बहुत है तेरी,
जिस दिन अच्छों को मिला जाम छलकता तेरा।

हरम-ओ-तैबा व बग़दाद जिधर कीजिए निगाह,
ज्योत पड़ती है तेरी, नूर है चाँदता तेरा।

तेरी सरकार में लाता है रज़ा उसको शफ़ी,
जो मेरा ग़ौस है और लाडला बेटा तेरा।

वाह क्या जूदो करम है शहे बतहा तेरा,
नहीं सुनता ही नहीं मांगने वाला तेरा।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी द्वारा रचित उर्दू नातिया साहित्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और विख्यात शाहकार है। इसमें पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ की असीमित उदारता (सख़ावत) और उनके सर्वोच्च मर्तबे को बहुत ही सुंदर काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि मक्का के सुल्तान (शहे बतहा) ﷺ की उदारता और दया इतनी महान है कि उनके दर से कोई भी याचक (मांगने वाला) कभी 'नहीं' या ना-उम्मीद होकर नहीं लौटता। कवि प्रार्थना करता है कि हे आक़ा, हम जनम-जनम से आपकी चौखट के टुकड़ों पर पले हैं, इसलिए हमें किसी और की ठोकर में न डालना क्योंकि आपका सदक़ा छोड़ कर हम भला कहाँ जाएँगे।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
जूदो करमउदारता और दया / सख़ावत और मेहरबानी
शहे बतहामक्का के बादशाह (पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ)
अता / सख़ादान या बख़्शिश / उदारता
शौकत का उलूशान की बुलंदी / महानता
साहिबे-ख़ानाघर का मालिक या मेज़बान
इसयांपाप / गुनाह या खताएं
राफ़े, नाफ़े, शाफ़ेबुलंद करने वाले, लाभ पहुँचाने वाले और शफ़ाअत (सिफारिश) करने वाले

सारांश (Summary)

इस नात-ए-पाक का मुख्य सार यह है कि हुज़ूर ﷺ इस पूरी कायनात के मेज़बान हैं, जहाँ ज़मीन और आसमान उनका दस्तरख़्वान हैं और पूरा संसार उनका मेहमान है। कवि अपने निकम्मेपन और गुनाहों (इसयां) को स्वीकार करता है, लेकिन उसे पूरा विश्वास है कि आक़ा ﷺ का एक छोटा सा इशारा उस जैसे लाखों पापियों के बेड़े को पार लगाने के लिए काफ़ी है। आला हज़रत (रज़ा) अंत में बयां करते हैं कि मक्का, मदीना से लेकर बग़दाद (ग़ौस-ए-आज़म) तक, हर पवित्र स्थान पर नबी ﷺ का ही रूहानी नूर चमक रहा है।

लिरिक्स के मुताबिक, नबी ﷺ के दरबार से कौन सा शख़्स कभी 'नहीं' (ना-उम्मीद) होकर नहीं लौटता?

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