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Unki Ja Me Jam Aakhen Shisha Hai Badan Mera Lyrics In हिन्दी


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टाइटल : Unki Ja Me Jam Aakhen Shisha Hai Badan Mera

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी

जोड़ा गया : 01 Aug, 2023 06:16 PM IST

बार देखा गया : 117

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा
उनकी बंद मुट्ठी में सारा बचपन मेरा

अरश गंज भी मेरी, ख़ित्ताए चमन मेरा
मैं गुलाम-ए-ख़्वाजा हूँ, हिंद है वतन मेरा

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा

अर्श से परे जाकर मुस्तफ़ा ने बतलाया
ये ज़मीं भी मेरी है और ये गगन मेरा

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा

हश्र में निया होगी ये गुलाम किसका
मुझ को देखकर कह देंगे या शाह-ए-ज़मां मेरा

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा

नात-ए-मुस्तफ़ा पढ़ना, नात-ए-मुस्तफ़ा सुनना
मुझ को बख्शवाएगा, हाँ यही चलन मेरा

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा

गुलशन-ए-मदीना से नज्मी मुझ को निस्बत है
एक-एक कली मेरी, गुल मेरा चमन मेरा

उनकी जा में जाम आँखें, शीशा है बदन मेरा
उनकी बंद मुट्ठी में सारा बचपन मेरा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नबी ﷺ की अज़मत, उनकी अता और मदीने से शायर की गहरी निस्बत का बयान है। इसमें बताया गया है कि इस पूरी कायनात पर उन्हीं का इख़्तियार है और महशूर के दिन उन्हीं की एक नज़र-ए-करम गुलामों की मग़फ़िरत (मुक्ति) का ज़रिया बनेगी।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि हुज़ूर ﷺ की पाकीज़ा ज़ात ही इस पूरी कायनात का नूर है और उनके इख़्तियार में सब कुछ है। शायर कहता है कि मेअराज की रात अर्श से परे जाकर मुस्तफ़ा ﷺ ने ज़मीन और आसमान पर अपना हक़ जताया, और महशर (कयामत) के मैदान में जब सब परेशान होंगे, तब हुज़ूर ﷺ अपने इस गुलाम को पहचान कर अपना कह देंगे।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ (Meaning)
ख़ित्ता-ए-चमनबाग़ का इलाका / हरा-भरा खित्ता
गुलाम-ए-ख़्वाजाख़्वाजा ग़रीब नवाज़ का सेवक/ग़ुलाम
अर्शआसमान / ईश्वर का सिंहासन
गगनआकाश / आसमान
हश्रकयामत का दिन / न्याय का दिन
शाह-ए-ज़मांज़माने के बादशाह (हुज़ूर ﷺ)
चलनआदत / तरीका या आचरण
निस्बतलगाव / गहरा संबंध या रिश्ता

सारांश (Summary)

कायनात की हर शय पर हुज़ूर ﷺ का करम है और हिंदुस्तान के गुलामों पर उनका ख़ास फ़ैज़ (कृपा) है। शायर 'नज्मी' कहते हैं कि नात-ए-मुस्तफ़ा पढ़ना और सुनना ही उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सहारा है, और मदीने के गुलशन से उनकी यही निस्बत उन्हें कयामत के दिन बख्शवाएगी।

शायर 'नजमी' के मुताबिक उनका कौन सा चलन उन्हें कयामत के दिन बख्शवाएगा, और उनका वतन कहां है?

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