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तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा Lyrics In हिन्दी

(तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा, तु अमीर-ए हरम, मैं फ़क़ीर-ए अजम)


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टाइटल : तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

लेखक/गीतकार : विविध/अज्ञात

नातख्वान/कलाकार: ओवैस रज़ा कादरी

जोड़ा गया : 08 Aug, 2023 12:44 PM IST

बार देखा गया : 438

Time to read: 2 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा,
तु अमीर-ए हरम, मैं फ़क़ीर-ए अजम,
तेरे गुण और ये लब, मैं तलब ही तलब,
तु अता ही अता, तु कुजा मन कुजा

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

इल्हाम है जामा तेरा,
क़ुरान इमामा है तेरा,
मिम्बर तेरा अर्श-ए बरीं,
या रहमतुल Lil आलमीन

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

तु हक़ीकत है, मैं सिर्फ़ एहसास हूँ,
तु समंदर, मैं भटकी हुई प्यास हूँ,
मेरा घर ख़ाक पर और तेरी राह-गुज़र,
सिदरतुल मुन्तहा, तु कुजा मन कुजा

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

ऐ फ़रिश्तो वो सुल्तान-ए मेराज हैं,
तुम जो देखोगे हैरान हो जाओगे,
ज़ुल्फ़ तफ़्सीर-ए वललैल बन जाएगी,
चेहरा क़ुरान सारा नज़र आएगा

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

मेरा आक़ा इमाम-ए साफ़-ए अंबिया,
नाम पे जिनके लाज़िम है सल्ले अला,
तु कुजा मन कुजा, मुस्तफ़ा मुजतबा,
ख़ातिमुल मुरसलीन, या रहमतुल Lil आलमीन

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

ख़ैरुल बशर रुतबा तेरा,
आवाज़-ए हक़ ख़ुतबा तेरा,
आफ़ाक़ तेरे समाईन,
साइस जिब्रील-ए अमीन,
या रहमतुल Lil आलमीन

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

तु है अह्राम-ए अनवार बांधे हुए,
मैं दुरूदों की दस्‍तार बाँधे हुए,
काबा-ए इश्क़ तु, मैं तेरे चार सू,
तु असर मैं दुआ, तु कुजा मन कुजा

तु कुजा मन कुजा, तु कुजा मन कुजा

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह मुज़फ़्फ़र वारसी साहब का लिखा हुआ विश्व प्रसिद्ध और रूहानी कलाम है, जिसमें उन्होंने हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की बेमिसाल अज़मत और उनके मुक़ाबले में अपनी आज़ीज़ी (कमतरी) को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां किया है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इस कलाम का अर्थ है, "आप कहाँ और मैं कहाँ!" अर्थात् आप ﷺ हरम के मालिक और दोनों जहानों के सुल्तान हैं, जबकि मैं एक अदना सा फ़क़ीर हूँ जिसकी झोली में सिर्फ़ ख़्वाहिशें हैं। शायर कहता है कि आप एक मुकम्मल हक़ीक़त हैं और मैं सिर्फ़ एक मामूली एहसास हूँ; आपकी राह-गुज़र आसमानों की आख़िरी सरहद (सिदरतुल मुन्तहा) है और मेरा ठिकाना मिट्टी पर है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Hindi / English Meaning)
तु कुजा मन कुजाआप कहाँ और मैं कहाँ (Where are You & Where am I)
अमीर-ए-हरमपवित्र हरम के मालिक / सुल्तान (Master of the Sanctuary)
फ़क़ीर-ए-अजमग़ैर-अरब दुनिया का एक अदना फ़क़ीर (Helpless person)
इल्हामदैवीय प्रेरणा या आकाशवाणी (Divine Revelation)
अर्श-ए-बरींसबसे ऊँचा आसमान / ईश्वर का सिंहासन (The Highest Heaven)
सिदरतुल मुन्तहासातवें आसमान पर स्थित वह पावन वृक्ष जिसके आगे फ़रिश्ते भी नहीं जा सकते
तफ़्सीर-ए-वललैलसूरह 'वल-लैल' (रात की क़सम) की व्याख्या — यहाँ हुज़ूर की ज़ुल्फ़ों की उपमा है
ख़ैरुल बशरमानव जाति में सबसे उत्तम और श्रेष्ठ (The best of mankind)
आफ़ाक़ / समाईनसारी कायनात या दिशाएँ / सुनने वाले (Horizons / Listeners)
साइसख़िदमतगार या देखभाल करने वाला (Groom / Caretaker)
दस्तारपगड़ी या सेहरा (Turban)
चार सूचारों तरफ़ / चारों दिशाओं में (In all four directions)

सारांश (Summary)

हुज़ूर ﷺ का मर्तबा इंसानी सोच और कल्पना से कहीं बुलंद है, जहाँ हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) उनके ख़िदमतगार हैं और उनका मिम्बर अर्श-ए-बरीं है। इस नात में बताया गया है कि आप ﷺ का नूरानी चेहरा मुकम्मल क़ुरआन की तरह है और आपकी ज़ुल्फ़ें रात के अंधेरे जैसी हसीन हैं। एक पापी और अदना इंसान सिर्फ़ दुरूदों का नज़राना पेश करके उनकी रहमत के समंदर से अपनी प्यास बुझाने की दुआ कर सकता है।

इस कलाम के मुताबिक, शायर ने हुज़ूर ﷺ के चेहरे और उनकी ज़ुल्फ़ों को क़ुरआन की किस सूरत या तफ़सीर से तशबीह (तुलना) दी है?

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