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तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां या रसूलअल्लाह Lyrics In हिन्दी

(तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां या रसूलअल्लाह, तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां या रसूलअल्लाह)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां या रसूलअल्लाह

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 16 Sep, 2023 05:51 AM IST

बार देखा गया : 280

Time to read: 3 min read

बोल (लीरिक्स) की भाषा चुनें:

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

हलीमा घर कदी वेखे, कदी सरकार नूँ वेखे
मैं कह दी सेज तेरे लाई सजावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

मेरा दिल वी ये चाहुंदा ऐ तुसी मेरे वी घर आओ
तेरी राहवां दे विच पल्कां विचहावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

जगाओ भाग मेरे वी अबू अयू़ब दे वंगूं
मुक़द्दर उस दा मैं कित्थों लियावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

मैं कुਝ वी नैँ जे तेरे नाल मेरी कोई नसब्त नैँ
मैं सब कुਝ हां जे मैं तेरा सदावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

सुना है आप हर आशिक़ के घर तशरीफ लाते हैं
मेरे घर में भी हो जाए चरागां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

मदीने पाक दे अंदर मेरी एहों इबादत ऐ
तेरे रौज़े तों न नज़रां हटावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

कोई तारीफ़ होवे ओस सोहणे दी, ज़हूरी वी
क़लम जामी दा मैं कित्थों लियावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

तेरा खावां मैं तेरे गीत गावां, या रसूलअल्लाह!
तेरा मीलाद मैं क्यूँ न मनावां, या रसूलअल्लाह!

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह नात शरीफ़ हुज़ूर ﷺ की आमद की खुशी और उनके प्रति एक उम्मती के गहरे प्रेम और समर्पण का सुंदर चित्रण है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

इन पंक्तियों का अर्थ है कि जब मेरा पूरा जीवन और रिज़्क़ हुज़ूर ﷺ के सदके में है, तो मैं उनकी प्रशंसा के गीत क्यों न गाऊं। शायर की दिली तमन्ना है कि काश उसे भी हज़रत अबू अय्यूब अंसारी जैसा सौभाग्य मिले और वह हुज़ूर ﷺ की राहों में अपनी पलकें बिछा सके।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
खावां/गावांखाता हूँ / गाता हूँ (पंजाबी शब्द)
मीलादजन्म का उत्सव (Celebration of Birth)
सेजबिछौना या बिस्तर (Bed/Couch)
निसबतसंबंध या लगाव (Connection)
तशरीफ लानापधारना या आना (To arrive/visit)
चरागांदीपों की रोशनी (Illumination)

सारांश (Summary)

इस कलाम का मुख्य भाव यह है कि हुज़ूर ﷺ से जुड़ाव (निसबत) ही एक इंसान की असली पहचान है; उनके बिना हम कुछ नहीं और उनके नाम से ही सब कुछ हैं। शायर अपनी कमियों को स्वीकारते हुए कहता है कि चाहे उसके पास महान कवियों जैसा हुनर न हो, लेकिन हुज़ूर ﷺ की याद में महफ़िल सजाना ही उसकी सबसे बड़ी इबादत है।

इस नात में शायर ने अपनी किस्मत (भाग) को जगाने के लिए किस मशहूर सहाबी की मिसाल दी है?

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