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तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो Lyrics In हिन्दी

(तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो, हूरों मलाईक चूमें तुमरी मज़ार हो)


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Shan E Nabi Team Desk
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टाइटल : तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो

श्रेणी (कटेगरी) : नात के बोल (लीरिक्स)

जोड़ा गया : 07 Sep, 2025 09:07 AM IST

बार देखा गया : 168

Time to read: 1 min read

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तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो,
हूरों मलाईक चूमें तुमरी मज़ार हो।

धरती चरण मा चूमे, झूमे संसार हो,
जगवा में आईगइलन रब के दिलदार हो।
तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो।

प्यारे नबी के रहे अइसन बर्ताव हो,
कलमा पढ़त हैं जिनका सारा संसार हो।

मक्का से हिजरत करके तैबा में अइले आका,
दीन के खातिर छोड़लन आपन घर-बार हो।

तैबा में लागल बाटे नूरी बाज़ार हो,
हूरों मलाईक चूमें तुमरी मज़ार हो।

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Lyrics Explanation, Word Meanings & Summary

This summary is AI-generated • Reviewed for quality.

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यह कलाम भोजपुरी मिश्रित उर्दू में नबी-ए-करीम ﷺ की शान और मदीना (तैबा) की रौनकों का वर्णन करता है। इसमें बहुत ही सरल और ग्रामीण मिठास के साथ हुज़ूर ﷺ के बलिदान और उनके नूरानी दरबार की महिमा गाई गई है।

व्याख्या (Lyrics Explanation)

कवि कहता है कि मदीना में नूर का बाज़ार लगा है, जहाँ स्वर्ग की अप्सराएँ और फरिश्ते हुज़ूर ﷺ के रोज़ा-ए-अकबर को चूमते हैं। जब से रब के महबूब इस दुनिया में आए हैं, पूरी धरती उनके चरणों का सम्मान करती है और सारा संसार उनकी आमद की खुशी में झूम रहा है।


शब्दों के अर्थ (Word Meanings)

शब्दअर्थ
नूरी बाज़ारप्रकाश की रौनक / दिव्य वातावरण
मलाईकफरिश्ते (Angels)
आईगइलनआ गए हैं
बर्ताव (वेहवार)व्यवहार / आचरण (Conduct)
कलमाइस्लाम का मूल मंत्र / गवाही
हिजरतमक्का से मदीना जाना (प्रवास)
घर-बारघर और परिवार
संसारदुनिया (World)

सारांश (Summary)

इस नात का सार यह है कि इस्लाम (दीन) की रक्षा और प्रचार के लिए हुज़ूर ﷺ ने अपना घर-बार और शहर छोड़ दिया और मक्का से मदीना चले गए। उनका चरित्र (अखलाक) इतना महान था कि आज पूरी दुनिया उनकी मुरीद है। यह गीत मदीना की उस पवित्रता को दर्शाता है जहाँ आज भी नूर की वर्षा होती है और दैवीय शक्तियाँ उनके दर पर झुकती हैं।

"दीन के खातिर छोड़लन आपन घर-बार हो"—क्या यह पंक्ति हमें यह याद नहीं दिलाती कि सच्चाई और धर्म की राह में किए गए बलिदान ही इंसान को अमर बनाते हैं?

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